फंडिंग
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 का संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्रस्तावित संशोधनों के तहत गैर-लाभकारी संगठनों के ऊपर यह संकट बना रहेगा कि यदि उनका एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों पर उनका नियंत्रण खत्म हो सकता हैक्या क्षेत्रीय भाषाएं क्राउडफंडिंग को ज़्यादा प्रभावी बनाती हैं?
स्थानीय भाषा और संस्कृति को दर्शाने वाले फंडरेजिंग कैंपेन डोनर्स का विश्वास जीतने में बेहतर साबित हो सकते हैं।फंडिंग के पीछे की कहानीः हैलो, हैलो, नमस्ते…
सीएसआर फंडरेजिंग केवल फाइल, रिपोर्ट्स और कॉल नहीं है, यह धैर्य, संवाद और लगातार उम्मीद बनाए रखने की कला है।फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा।संस्थाओं की बुनियादी फंडिंग की कुंजी
भाषा और प्रक्रियाओं में सूक्ष्म बदलाव से आप अपनी संस्था की बुनियादी जरूरतों के लिए फंड सुनिश्चित कर सकते हैं।क्वीयर और ट्रांस समावेशन: ढांचागत सोच से सशक्त होगी भागीदारी
समावेशन पर चर्चा के बावजूद क्वीयर और ट्रांस व्यक्तियों को अब भी संस्थानों, आजीविका के विकल्पों और नीति-निर्माण के मंचों से व्यवस्थित बहिष्कार झेलना पड़ता है।कला में निवेश है सामाजिक बदलाव की कुंजी
भारत के विकास सेक्टर में कला की भूमिका केवल कुछ प्रयासों तक सीमित है। यह स्थिति क्यों बदलनी चाहिए और फंडर कैसे दिखा सकते हैं एक नयी राह?आज के लाभार्थी, कल के दानदाता कैसे बन सकते हैं?
एफएफई का एल्मनाई एंगेजमेंट मॉडल बताता है कि समाजसेवी संस्थाओं से सहयोग और समर्थन पाने वाले, उनके कार्यक्रमों को लंबे समय तक चलाए रखने वाले फ़ंडिंग मॉडल का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।क्या है एक रिर्सचर का काम
सीमित फंडिग का क्या हैं परिणाम, समस्याओं की पहचान या समस्याओं का आविष्कार?सामाजिक उद्यमी कैसे बनें?
सामाजिक उद्यमी बनने के लिए आपको किन कौशलों की जरूरत है, वे कौन सी चुनौतियां है जिनका सामना आपको करना पड़ सकता है और वे कौन से पहलू हैं जहां आपको मदद की जरूरत पड़ती है।एफसीआरए क्या है और समाजसेवी संस्थाओं के लिए यह महत्वपूर्ण क्यों है?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) का इतिहास, भारतीय समाजसेवी संस्थानों पर प्रभाव और इससे जुड़े विवादों की जानकारी।