आजीविका
क्या बेहतर उद्यमिता और रोज़गार सृजन भारत में गरीबी ख़त्म कर सकता है?
आर्थिक इतिहास के महान दिग्गजों ने रोज़गार सृजन और गरीबी में कमी के बीच के संबंध को पहचाना है, फिर भी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।किसान उत्पादक संगठनों की सफलता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?
किसानों की आय उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफ़पीओ) को मार्केट-रेडी उत्पाद का मॉडल विकसित करने और विकेंद्रीकृत उत्पादन पर ज़ोर देने की ज़रूरत है।मेरे पिछले जीवन में याद करने जैसा कुछ नहीं है
तमिलनाडु के एक पूर्व बंधुआ श्रमिक जो अब एक सामुदायिक नेता हैं, अपने एक दिन का हाल बताते हुए समुदाय की स्थिति बेहतर बनाने के प्रयासों का ज़िक्र कर रहे हैं।नवीकरणीय ऊर्जा, हमेशा पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित कैसे बनी रह सकती है
भारत में स्वच्छ ऊर्जा सेक्टर तेज़ी से विकसित हो रहा है लेकिन क्या यह परिवर्तन लोगों और हमारे ग्रह के अनुकूल है जिसे हर कोई चाहता है?राजस्थान के कृषि मजदूर एक से दूसरे गांव प्रवास क्यों करते हैं?
राजस्थान के आदिवासी समुदायों से आने वाले अकुशल श्रमिक गुजरात के गांवों में जाकर कृषि मज़दूरी करते हैं लेकिन इस पलायन की वजहें और समस्याएं आज भी अदृश्य लगती हैं।फोटो निबंध: अहमदाबाद की बॉयलर फैक्ट्री के श्रमिकों की स्थिति की एक झलक
अहमादाबाद की बॉयलर फैक्ट्रियों में जहां एक तरफ उद्योग मानकों का पालन नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों से स्वास्थ्य और जीवन के लिए घातक परिस्थितियों में काम लिया जा रहा है।फोटो निबंध: सार्वजनिक भूमि को बचाए रखने में पूरे गांव की भूमिका होती है
राजस्थान में मवेशियों के लिए चारे की कमी और सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे थाना गांव ने समुदाय की मदद से इसका हल ढूंढ लिया है।राजस्थान में आज भी महिलाओं को डायन बताने की कुप्रथा क्यों क़ायम है?
राजस्थान समेत देशभर में आज भी महिलाओं को डायन बताकर उत्पीड़ित करने की कुप्रथा है जिसकी जड़ें पितृसत्ता, मानवीय लालच और कमजोर कानूनों में दबी दिखाई देती हैं।दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हुए उद्यमिता शिक्षा के प्रयोग से क्या पता चलता है?
स्कूली बच्चों में बुनियादी कौशल और उद्यमी मानसिकता विकसित करना, उनकी रचनात्मकता को बढ़ाने और उन्हें बेहतर करियर विकल्पों की तरफ ले जाने वाला हो सकता है।