October 18, 2024

महिला किसान और उनके अलग-अलग भाव 

महिला किसान दिवस पर महिला किसानों की अलग-अलग भावनायें, जो अक्सर उनके भीतर दबी रहती हैं।
4 मिनट लंबा लेख

1. जब महिला किसान दिवस पर लोग शुभकामनायें दे रहे होते हैं।

फूलों के साथ एक महिला_महिला किसान

2. लेकिन जब ऑनलाइन ‘किसान’ शब्द सर्च करने पर सिर्फ किसान पुरुषों के बारे में ही जानकारी आए।

विचार करती एक महिला_महिला किसान

3. जब ट्रैक्टर वाला, महिला किसान से खेत जोतने के ज्यादा पैसे मांगे। 

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी
हाल के साथ एक महिला_महिला किसान

4. जब तमाम वायदों के बावजूद भी पंचायत सिंचाई की व्यवस्था न करे।

एक महिला और एक पुरुष_महिला किसान

5. जब अपनी फसल का जायज़ दाम मांगने के बावजूद आढ़ती अपनी बात पर ही अड़ा हो।

बंदूक लिए महिला_महिला किसान

6. एक महिला किसान जो घर का काम निपटाकर खेत में काम करने आती है और फिर उसे घर जाकर काम करने की चिंता सताये…

खेत में एक महिला_महिला किसान

7. जब गांव में कृषि विकास पर चर्चा हो रही हो और उस चर्चा में केवल पुरुष किसानों को ही न्यौता मिले।

दो महिलायें_महिला किसान

8. जब गांव की बेटियां कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने में रुचि दिखाएं और घर के पुरुष उन्हें टीचर बनने की सलाह दें…

एक साथ कई महिलाएं_महिला किसान

लेखक के बारे में
इंद्रेश शर्मा-Image
इंद्रेश शर्मा

इंद्रेश शर्मा आईडीआर हिंदी में पार्टनरशिप और आउटरीच हेड हैं। वे संगठन की पहुंच बढ़ाने और असरदार साझेदारी बनाने के लिए विकास सेक्टर से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इन्द्रेश संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी संगठनों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से जुड़े लेखन में भी सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। उनके पास विकास सेक्टर में 13 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इससे पहले वे सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्था से जुड़े थे, जहां वे रिसर्च, कार्यक्रम निर्माण और प्रशिक्षण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

जूही मिश्रा-Image
जूही मिश्रा

जूही मिश्रा आईडीआर में एडिटोरिएल एसोसिएट हैं। उन्हें पत्रकारिता का 14 साल का अनुभव है और उन्होंने पत्रिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, रोर मीडिया, दूता टेक्नोलॉजी और ग्राम वाणी के साथ काम किया है। जूही ने विकास संवाद संस्था से फेलोशिप पूरी की है, जहाँ उन्होंने बसोर समुदाय में खाद्य प्रणालियों और कुपोषण के कारणों पर शोध किया।

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