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भारत के भूमि क़ानून महिलाओं को भूमि अधिकार दिला पाने में सक्षम क्यों नहीं हैं?
भारत के भूमि क़ानून सैद्धांतिक रूप से तो महिलाओं को भूमि अधिकार देते हैं लेकिन इन्हें जिस तरह से लागू किया जाता है, वह एक बड़ी बाधा है।मुख्यधारा के मीडिया से भारत के आदिवासी समुदाय गायब हैं
शिखा मंडी संथाली भाषा में काम करने वाली भारत की पहली रेडियो जॉकी हैं और यहां वे जनजातीय समुदायों के मीडिया प्रतिनिधित्व और उसके असर पर बात कर रही हैं।बैंक महिलाओं के वित्तीय समावेशन को कैसे संभव बना सकते हैं
पीएमजेडीवाय जैसी योजनाओं का लाभ उठाने के बावजूद निम्न आयवर्ग वाले घरों की महिलाएं बचत के लिए बैंकों के इस्तेमाल से क्यों झिझकती हैं और उनके नज़रिए को कैसे बदला जा सकता है?समाजसेवी संगठन अपने कामकाज को डिजिटल कैसे बनाएं?
तकनीक से जुड़े कुछ सबक़ जो समाजसेवी संस्थाओं के उन लीडर्स के काम आ सकते हैं जो इसका लाभ तो उठाना चाहते हैं लेकिन तरीके नहीं जानते हैं।एक आदिवासी पत्रकार जो अनकही कहानियां कहने के लिए न्यूज़रूम छोड़ यूट्यूब पर आ गई
गुजरात की महिला पत्रकार यूट्यूब रिपोर्टिंग का इस्तेमाल, अनुसूचित जनजाति समुदायों को जागरुक करने और उनसे जुड़ी खबरें दुनिया तक पहुंचाने के लिए कर रही हैं।आर्थिक, सामाजिक या स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों के लिए साझेदारी कैसे करें?
पांच सुझाव जो साझेदारियों को सफल बनाने और इनसे अधिकतम लाभ उठाने के काम आ सकते हैं।बुजुर्गों के लिए बनी एक हेल्पलाइन समाजसेवी संस्थाओं को विस्तार के तरीके सिखाती है
किसी कार्यक्रम को बनाना और उसे विस्तार देना चुनौतीपूर्ण काम है, यह आलेख बुजुर्गों की सहायता के लिए बनाई गई एक हेल्पलाइन के जरिए बताता है कि इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है।समाजसेवी संस्थाएं अपने कार्यक्रमों की साझेदारी कैसे तैयार कर सकती हैं?
साझेदारी से समाजसेवी संस्थाएं अपने विचार और नजरिए को विस्तार दे सकती हैं, ऐसा करने के लिए संगठनों को उपयुक्त साथी की जरूरत होती है जिसमें नीचे दिए गए सुझाव काम आ सकते हैं।चार जनजातियां, चार व्यंजन और परंपरागत खानपान पर ज्ञान की चार बातें
चार जनजातियों के रसोइये अपने व्यंजनों के साथ अपनी खाद्य संस्कृति पर आए खतरों पर चर्चा कर रहे हैं क्योंकि जंगलों के खत्म होने के साथ उनके समुदाय आजीविका के लिए संघर्ष करते हुए शहरों का रुख करने लगे हैं।क्यों बाल-विवाह पर असम के मुख्यमंत्री की कार्रवाई पर रोक लगनी चाहिए?
बाल-विवाह का अपराधीकरण कर असम सरकार एक तरफ जहां महिलाओं के निजी चुनाव के अधिकार का हनन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ इसके रोकथाम के प्रयासों को भी कमजोर कर रही है।