महिला भागीदारी
न छांव, न सुरक्षा: दिल्ली के लेबर चौकों पर मजदूरों का संघर्ष
दिल्ली के लेबर चौकों पर काम करने वाले मजदूरों को उम्र के आधार पर भेदभाव, कम मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करना पड़ता है। जानें, कैसे निष्क्रिय कल्याणकारी राशि के उपयोग से इन्हें बेहतर बनाया जा सकता है।कड़े श्रम कानून कैसे बनते हैं प्रगति में बाधा?
पुलियाबाजी के इस पॉडकास्ट में जानिए कि श्रम कानूनों में आए बदलाव कौन से जरूरी सवाल उठाते हैं, जिनके जवाब तलाशा जाना महत्वपूर्ण है।रोजगार के सवाल पर 2026 का बजट क्या कहता है?
बजट 2026 के रोजगार दावे मनरेगा, मजदूरी और सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाइयों से मेल खाते नहीं दिखते। असंगठित श्रमिकों के हालात दर्शाते हैं कि कौशल विकास के बावजूद स्थायी रोजगार अब भी एक दूर का लक्ष्य है।फोटो निबंध: जलवायु अनुकूलन को नए आयाम देती नागालैंड की औरतें
नित बढ़ते तापमान में दीमापुर की महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेता पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सिविल-सोसाइटी नेटवर्कों का रूख कर रही हैं। उनकी यह कोशिश शहरी अनुकूलन की एक अलग और मानवीय समझ को उभारती है।हमारे स्कूलों से क्यों नदारद है सावित्रीबाई फुले की कहानी?
क्या हमारे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सावित्रीबाई फुले के कद के मुताबिक उनकी बात की जाती है, उनसे हमारा परिचय बतौर देश की पहली शिक्षिका क्या हमारे स्कूलों और कॉलेजों में करवाया जाता है?फोटो निबंध: बीमारी और एकाकीपन के बीच नमक उगाता अगरिया समुदाय
कच्छ के छोटे रण में नमक की खेती करने वाली अगरिया महिलाएं पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए विवश हैं।कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ लामबंद होती घरेलू कामगार महिलायें
एनसीआर में घरेलू कामगार महिलायें सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नियोक्ताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बना रही हैं।हम स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने में कहां पिछड़ रहे हैं?
भारत में स्थानीय उद्यमिता, आज भी कई तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत बाधाओं के चलते सीमित है लेकिन योजनाओं के साथ-साथ इससे जुड़ी समझ को बढ़ाने पर काम कर स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।मराठवाड़ा का अपनी तरह का एक अनोखा एकल महिला संगठन
द थर्ड आई के इस पॉडकास्ट में सुनें मराठवाड़ा, महाराष्ट्र में बने एकल महिलाओं के अनोखे संगठन के बारे में। और, जानें यह कैसे बना और कैसे लोगों की जिंदगी बदल रहा है।महिला किसान और उनके अलग-अलग भाव
महिला किसान दिवस पर महिला किसानों की अलग-अलग भावनायें, जो अक्सर उनके भीतर दबी रहती हैं।