गीता राजस्थान के उदयपुर में निर्माण कार्यों की ठेकेदार हैं। वह एक एकल मां भी हैं। वह अपने घर और बच्चे के साथ-साथ निर्माण स्थलों की ज़िम्मेदारी भी संभालती हैं। गीता कास्टिंग (ढलाई) का काम करती हैं। साइट्स पर उनके मज़दूरों में बहुत-सी महिला मज़दूर भी शामिल होती हैं। मज़दूरों के काम की निगरानी करने से लेकर निर्माण-सामग्री की व्यवस्था करने और समय पर काम पूरा कराने तक की हर छोटी-बड़ी चुनौती उनके काम का हिस्सा है। निर्माण कार्य को पुरुष-प्रधान क्षेत्र माना जाता है, जहां महिलाओं के श्रम और उनके प्रबंधन की क्षमता को कम आंका जाता है। मगर उदयपुर में गीता ने अपनी मेहनत और नेतृत्व क्षमता के बलबूते इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
उनका दिन सुबह जल्दी शुरू होता है। घर की ज़िम्मेदारियों को संभालने के बाद वह सीधे निर्माण स्थल पहुंचती हैं। अक्सर मज़दूरों को इकट्ठा करने, काम की नई साइट्स पर जाने और दिन-भर काम की व्यवस्था बनाने में उनका पूरा दिन गुज़र जाता है। साथी मज़दूरों के साथ गीता का रिश्ता महज़ काम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह उनकी वेतन से जुड़ी समस्याओं के समाधान भी निकालती हैं। यही नहीं, वह मज़दूरों के कार्ड बनाने के लिए उन्हें प्रेरित करती हैं और साइट्स पर उनके साथ मिलकर वह खुद भी निर्माण कार्य में हाथ बंटाती हैं।
ठेकेदारी के काम ने गीता को न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि इस कार्य क्षेत्र में उनकी पहचान भी बनाई है। वह अपने काम के ज़रिए समाज की कई धारणाओं को तोड़ रही हैं। तमाम मुश्किलों के बीच हमेशा खुद को उत्साहित रखकर और अपनी मेहनत के बल पर ही वह आज यहां तक पहुंची हैं।
निर्माण स्थल की भागदौड़, मज़दूरों के साथ समन्वय, साइट पर लिए जाने वाले फैसलों और अन्य ज़िम्मेदारियों के बीच गीता का एक दिन कैसा बीतता है यह जानने के लिए आईडीआर के इस वीडियो को देखिए।
गीता मीणा, जनदक्षा ट्रस्ट की सक्रिय श्रमिक सदस्य हैं। इस वीडियो के शूट में जनदक्षा के प्रोग्राम मैनेजर परशराम लोहार जी ने सहयोग किया है।
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लेखक के बारे में
- गीता मीणा निर्माण कार्य से जुड़ी एक महिला ठेकेदार हैं। वह मज़दूरों की अपनी टीम के साथ मिलकर लेंटर कास्टिंग (ढलाई), गिट्टी भरने और अन्य निर्माण कार्यों को संभालती हैं।
