श्रमिक
फोटो निबंध: ताड़ी से जुड़े पासी समुदाय पर आजीविका की दोहरी मार
गया के पासी समुदाय की आजीविका पीढ़ियों से ताड़ी से जुड़ी रही है। लेकिन शराबबंदी, घटते पेड़ और रोजगार की कमी से पलायन बढ़ा है, जिसका असर महिलाओं और बच्चों पर भी दिख रहा है।फोटो निबंध: बीमारी और एकाकीपन के बीच नमक उगाता अगरिया समुदाय
कच्छ के छोटे रण में नमक की खेती करने वाली अगरिया महिलाएं पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए विवश हैं।सुंदरबन में समुदाय द्वारा शिक्षा के लिए की गई एक सुंदर पहल
सुंदरबन के एक गांव में शुरू हुआ एक निशुल्क शिक्षा और देखभाल केंद्र जिसे समुदाय ने श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए शुरू किया है।फोटो निबंध: पॉपलर की कमी से जूझता कश्मीर का ‘पेंसिल गांव’
कश्मीर का ओखू गांव भारत में पेंसिल की स्लैट का सबसे बड़ा उत्पादक है। पॉपलर वृक्षों की कटाई ने लकड़ी की आपूर्ति, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था—तीनों को संकट में डाल दिया है।क्या स्थानीय मोबाइल रिपेयर की दुकानें ई-कचरे को कम करने में मदद कर सकती हैं?
कंप्यूटर और मोबाइल रिपेयर की दुकानों लंबे समय से उपकरणों के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद कर रही हैं। लेकिन उन्हें जीवित रहने के लिए समर्थन की ज़रूरत है।दांव पर ज़िंदगी: अरबों के टेक्सटाइल उद्योग का कड़वा सच
सूरत का भव्य टेक्सटाइल उद्योग भले ही समृद्धि की मिसाल हो, लेकिन इसकी बुनियाद प्रवासी श्रमिकों की बदहाल जीवन परिस्थितियों पर टिकी है।प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित भविष्य की राह एक सुविचारित नीति से ही निकलेगी
कोविड महामारी के दौरान ही पता चल गया था कि प्रवासी श्रमिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए नीतियां, प्रक्रियाएं और प्रणालियां तत्काल तय किए जाने की ज़रूरत है।