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बुंदेलखंड में पानी और जाति के बीच दूरी बरकरार है
शेड्स ऑफ़ रूरल इंडिया के इस वीडियो से समझिए कि देश की सामाजिक संरचना में आधुनिक दौर में भी जातिगत भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं।फोटो निबंध: नकदी फसलों और हाईवे के बीच रंगलोंग समुदाय का संघर्ष
उत्तरी त्रिपुरा में रबर और सुपारी जैसी नकदी फसलों की बढ़ती मांग के कारण रंगलोंग समुदाय की बांस-आधारित आजीविका और जीवनशैली पर संकट गहरा रहा है।जिला ‘इम्पैक्टपुर’ में इम्पैक्ट की आंधी, तूफान और बवंडर!
जिला इम्पैक्टपुर में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं ने ऐसा कमाल किया कि स्कूलों की संख्या कम पड़ गई। कैसे? यहां जानिए!पर्यावरण सखियां: जिनके जिम्मे है कचरा प्रबंधन से लेकर पर्यावरण की रखवाली तक
सहस्त्रधारा, उत्तराखंड में सक्रिय पर्यावरण सखियों का काम सिर्फ कचरा इकट्ठा करने और छांटने तक सीमित नहीं है बल्कि यह उनकी अपनी धरती-हवा-पानी को सुरक्षित और संरक्षित करने का भी प्रयास है।एक समावेशी स्कूल कैसा होना चाहिए?
विकलांगता से प्रभावित बच्चों के लिए अलग-थलग समाधान की नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है ताकि समावेशन संभव हो सके।वर्क-फ्रॉम-होम के लिए कोई वजह चाहिए क्या?
पेश हैं घर से काम करने की सात अजीबोगरीब वजहें, जो शत-प्रतिशत सच हैं।सरल कोश: इंटरसेक्शनैलिटी
इंटरसेक्शनैलिटी यानी किसी व्यक्ति की पहचान एक नहीं, कई पहलुओं से मिलकर बनती है। विकास सेक्टर में इंटरसेक्शनैलिटी जरूरी है, क्योंकि यह नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाती है।आईडीआर इंटरव्यूज | राजिम केतवास
पिछले चार दशकों से श्रमिक एवं महिला अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रही राजिम केतवास मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन में भागीदारी से लेकर अपने संगठन दलित आदिवासी मंच की स्थापना तक की यात्रा और अनुभवों को साझा कर रही हैं।सोशल सेक्टर में कैपेसिटी बिल्डिंग: किसके लिए क्या मायने?
विकास सेक्टर में सबके लिए कैपेसिटी के मायने अलग हैं - किसी के लिए यह सीख है, किसी के लिए चुनौती तो किसी के लिए महज एक और पीपीटी।नए पर्यावरण नियमों में खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट क्यों दी जा रही है?
बीते दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों का हवाला देते हुए सरकार ने यूरेनियम, लिथियम सहित कई महत्त्वपूर्ण खनिजों की खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट दे दी है।तमिलनाडु के उदाहरण से समझिए मातृ मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद की जरूरत क्यों है?
तमिलनाडु में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का नई माताओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, लेकिन इससे जुड़े नीतिगत हस्तक्षेपों के प्रयास अभी नजर नहीं आते हैं।छोटी संस्थाओं की बड़ी जरूरत: क्यों अहम हैं सरल डिजिटल टूल?
जब संस्थाएं अपनी जरूरतें समझने का प्रयास करती हैं, तो उनके लिए डिजिटल टूल अपनाने की प्रक्रिया अपने आप सहज हो जाती है।