मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर राजनगर तहसील के जमुनिया गांव का यह प्रसंग, क्षेत्र में व्याप्त सामाजिक विषमता और संरचनात्मक सीमाओं को उजागर करता है। इस गांव में आज भी जातिगत भेदभाव और छुआछूत की प्रथाएं इतनी गहराई से रची-बसी हैं कि लोग एक ही कुएं से सामूहिक रूप से पानी भरने से परहेज करते हैं।
बुंदेलखंड के इस हिस्से में जाति आधारित विभाजन न केवल सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि पहले से ही गंभीर जल संकट को कई गुना अधिक जटिल और दुष्कर बना देता है।
यह लेख मूल रूप से शेड्स ऑफ रूरल इंडिया पर प्रकाशित हुआ था।



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