आदिवासी अधिकार
झारखंड के पेसा नियम, मूल नियमों से कितने अलग हैं?
झारखंड पेसा नियमावली, 2025 का धारा दर धारा विश्लेषण।आदिवासी समूहों की एकजुट पहल: जल और जमीन पर अधिकार की मांग
आदिवासी जनजातियां भू-अधिकारों और मत्स्य पालन को लेकर संगठित हो रही हैं, ताकि अपनी पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रख सकें।सिक्किम का लेप्चा समुदाय अपनी नदियों को लेकर चिंता में क्यों है?
सिक्किम के लेप्चा आदिवासी अपने इलाके की नदियों और उससे जुड़ी अपनी परंपराओं को बचाने के लिए सामाजिक आंदोलन से लेकर कानूनी लड़ाई तक लड़ रहे हैं।मध्य प्रदेश के आदिवासी, जंगलों की आग रोकने के लिए परंपराएं तक छोड़ रहे हैं
मध्य प्रदेश, जंगल की आग से प्रभावित राज्यों में तीसरे स्थान पर आता है लेकिन अब आदिवासियों और वन विभाग के साझा प्रयास स्थिति को बदल रहे हैं।आईडीआर इंटरव्यूज | मधु मंसूरी हंसमुख
पद्मश्री सम्मान से नवाजे जा चुके लोकगीत कलाकार मधु मंसूरी हंसमुख ने आईडीआर के साथ अपनी बातचीत में बताया कि कैसे छोटी सी उम्र से ही इन्होंने लोकगीत को अपना हथियार बनाकर झारखंड आंदोलन को एक नई दिशा और चेतना प्रदान की।थारू आदिवासी: जहां प्रतिरोध एक परंपरा है
लखीमपुर खीरी के थारू आदिवासी, दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना के समय से ही वन विभाग के साथ संघर्ष कर रहे हैं और अब उनकी दूसरी-तीसरी पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है।क्या केवल प्रमाण पत्र देकर जंगलों को बचाया जा सकता है?
भारत में वन एवं लकड़ी प्रमाणपत्र योजना बहुत ही महंगी है और इससे वनोपज का उचित उत्पादन या बेहतर वन प्रबंधन भी सुनिश्चित नहीं होता है।घुमंतू जनजातियां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित क्यों हैं?
सामाजिक कल्याण योजनाएं बनाते हुए अक्सर खानाबदोश और अधिसूचित जनजातियों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाता है जिसे बदले जाने की ज़रूरत है।