आजीविका
यमुना खादर में बसे लोगों के जीवन और आजीविका पर कितनी तरह के खतरे हैं?
यमुना खादर में बसने और काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों का जीवन कभी बाढ़, कभी जमीन मालिक तो कभी विकास परियोजनाओं के चलते संकट में दिखता है।फोटो निबंध: क्यों लुप्त होने की कगार पर हैं असम की खूटियां?
कभी असम के नदी द्वीपों में अर्ध-घुमंतू पशुपालकों की ठौर रही खूटियां आज अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।कन्नौज: जलवायु संकट से घिरी इत्र नगरी
बढ़ते तापमान के चलते कन्नौज में फूलों का उत्पादन कम हो गया है जो यहां के इत्र व्यापार और उससे मिलने वाले रोजगार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।गिग कामगारों को बुनियादी अधिकार देने वाले कानूनों की राह इतनी कठिन क्यों है
लंबे समय तक एडवोकेसी और संघर्ष के बाद बने कानूनों से कई राज्यों में गिग और प्लेटफार्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन तो मिला है लेकिन इतना भर होना काफी नहीं है।फोटो निबंध: ताड़ी से जुड़े पासी समुदाय पर आजीविका की दोहरी मार
गया के पासी समुदाय की आजीविका पीढ़ियों से ताड़ी से जुड़ी रही है। लेकिन शराबबंदी, घटते पेड़ और रोजगार की कमी से पलायन बढ़ा है, जिसका असर महिलाओं और बच्चों पर भी दिख रहा है।फोटो निबंध: बीमारी और एकाकीपन के बीच नमक उगाता अगरिया समुदाय
कच्छ के छोटे रण में नमक की खेती करने वाली अगरिया महिलाएं पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए विवश हैं।भारत के आपदा प्रबंधन में पशुओं को भी जगह मिलनी चाहिए
भारत में आपदा प्रबंधन नीतियों में पशुओं को शामिल करना सिर्फ संवेदनशीलता का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े तबके की आजीविका का भी सवाल है।