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विकलांगता के अनुकूल कार्यस्थल का निर्माण: समावेशिता क्यों मायने रखती है
एक समावेशी नेतृत्वकर्ता ‘हम लोग बनाम वे लोग’ के कथन को केंद्र में रखकर काम नहीं करता है। उन्हें कार्यस्थल में अपने और उन लोगों के बीच मौजूद समानताओं पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जिनसे उनका संवाद स्थापित होता है।कम समय, हजारों कहानियाँ: जमीन पर काम कर रहे एक पत्रकार की डायरी
उन्नाव के एक पत्रकार के जीवन का एक दिन जो यूपी चुनावों से लेकर दुर्घटनाओं और अपराधों के साथ-साथ स्थानीय न्यूज पर भी नजर रखता है।लोगों का हम पर से भरोसा उठ गया है
दक्षिणी राजस्थान में लोग स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं से दवाइयाँ लेने के लिए तैयार रहते हैं लेकिन आशा कार्यकर्ताओं से नहीं।भारत के वित्तीय सेवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना इतना मुश्किल क्यों है
बैंकिंग क्षेत्र की डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली का लैंगिक बाधाओं और प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुंच की समस्या को हल करना जरूरी है।समावेशी समुदायों को बनाना नागरिक समाज का कर्तव्य है
जब तक विभिन्न समुदाय लिंग, जाति, वर्ग और धर्मों के आधार पर लोगों को बाहर रखना बंद नहीं करेंगे तब तक एसडीजी को हासिल करने की तमाम कोशिशें कम पड़ती रहेंगी।“हमारे पास सबमें फिट होने वाली एक ही आकार की संचार रणनीति नहीं हो सकती है”
कोविड-19 के इस संकट भरे दौर में साक्ष्य-आधारित और समुदाय-केन्द्रित संवाद अफवाहों और फेक न्यूज के प्रसार को रोक सकता है।भुज की बहनों से मिलें
पिछले दो दशकों से कच्छ के 200 गांवों में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही एक अर्धन्यायिक (पैरालीगल) के जीवन में एक दिन।‘विरासत’ में मिले बोर्ड का प्रबंधन
आने वाले सीईओ को न केवल संस्था के कर्मचारी और इसके कार्यक्रम विरासत में मिलते हैं बल्कि इसका बोर्ड भी विरासत में मिलता है। नए सीईओ और बोर्ड के बीच के संबंध को बेहतर बनाने के लिए हम यहाँ कुछ तरीके आपको बता रहे हैं।कार्यस्थल पर अदृश्य विकलांगता से जूझ रहे कर्मचारियों को सहयोग देना
ऑटिज्म, एडीएचडी और डिप्रेशन जैसी अदृश्य अक्षमताओं से ग्रस्त लोगों के लिए संगठन पांच तरीकों से समावेशी नीतियां बना सकते हैं।