फंडरेजिंग और संवाद
आज के लाभार्थी, कल के दानदाता कैसे बन सकते हैं?
एफएफई का एल्मनाई एंगेजमेंट मॉडल बताता है कि समाजसेवी संस्थाओं से सहयोग और समर्थन पाने वाले, उनके कार्यक्रमों को लंबे समय तक चलाए रखने वाले फ़ंडिंग मॉडल का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।एक सफल रेडियो अभियान के लिए क्या चाहिए?
समाजसेवी संस्था साहस द्वारा ई-वेस्ट से जुड़ी जागरुकता बढ़ाने के लिए चलाए गए रेडियो अभियान के अनुभव, प्रचार अभियानों के डिज़ाइन तैयार करना सिखाते हैं।एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है।कैसे समाजसेवी संगठन अपनी कहानी सकारात्मकता से कह सकते हैं?
सामाजिक संगठनों का अपने कार्यक्रमों की पिच तैयार करते हुए सकारात्मक भाषा और उदाहरण अपनाना सोच बदलने वाला साबित होगा।फंडरेजिंग के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सही इस्तेमाल कैसे करें?
संगठन की वेबसाइट से फंडरेजिंग करने और क्राउडफंडिग में से एक चुनने की शर्त जरूरी नहीं है क्योंकि दोनों तरीक़ों का एक साथ इस्तेमाल करने के विकल्प भी मौजूद हैं।समाजसेवी संस्थाएं फंडरेजिंग की रणनीति कैसे बनाएं?
शोध, नेटवर्किंग, लीडरशिप और टीम तैयार करने से जुड़े ये नौ सुझाव अपनाकर समाजसेवी संस्थाएं बेहतर फंडरेजिंग हासिल कर सकती हैं।समाजसेवी संगठन खुदरा फंडरेज़िंग की शुरूआत कैसे कर सकते हैं?
रिटेल फंडरेज़िंग से न केवल सीएसआर और एचएनआई फ़ंडिंग पर स्वयंसेवी संस्थाओं की निर्भरता कम होती है बल्कि दानदाताओं का एक समुदाय बनाने में भी मदद मिलती है।चार तरीके जो फंडरेज़िंग को आसान बनाते हैं
दानकर्ताओं से आर्थिक मदद मिलना मुश्क़िल है लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखकर इसमें आसानी से सफलता हासिल की जा सकती है।प्रभावी संचार से जुड़ी तमाम जानकारियां जो एक भारतीय एनजीओ के लिए जरूरी हैं
वन-पर्सन कम्युनिकेशन आर्मी, या कहें सीमित संसाधनों में प्रभावी संचार रणनीति बनाने के उपाय और उपकरण।एक दानदाता के दृष्टिकोण से धन इकट्ठा करना
भारतीय सामाजिक क्षेत्र में दस सालों से अधिक धन इकट्ठा करने का अनुभव रखने वाले जानकारों के सुझाव।2022 में FCRA: अब तक का सफ़र और उसका असर
FCRA में हुए संशोधनों के संक्षिप्त इतिहास से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं और आम आदमी पर इनके असर तक, इस क़ानून के बारे में वह सबकुछ जो आपको जानना चाहिए।भारत में व्यक्तिगत दान देने वालों तक पहुंचना
आँकड़ों के अनुसार आम लोग अब पहले से अधिक दान देते हैं। स्वयंसेवी संस्थाएँ ऐसे कई कदम उठा सकती हैं जिससे परोपकार के इस क्षेत्र से अधिकतम लाभ हासिल किया जा सके।