भारतीय परिवारों के परम ब्रह्मास्त्र

हमारे भारतीय परिवारों की सबसे बड़ी विरासत अगर कुछ है, तो वह है भावनात्मक अस्त्र। असल में यह एक ऐसा प्राचीन संविधान है, जिसे कभी लिखा नहीं गया। परंतु आज के आधुनिक युग में भी इसे वैसे ही इस्तेमाल किया जाता है, जैसा मेसोपोटामिया की सभ्यता में किया जाता था। इतने लंबे अरसे के बावजूद यह इतना कड़क है कि बड़े-बड़े तीस मार ख़ां भी इसके काटे से पानी न मांगे…
तो पेश है अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर भारतीय परिवारों के कुछ बलशाली हथियार –
पहला टूल- लोग क्या कहेंगे?
जब भी आप पूरी दुनिया और अपने अंतर्मन से लड़कर फुल जोश में अपने परिवार को बतायें कि आप कुछ अलग करना चाहते हैं-

दूसरा टूल- उनके बच्चे को देखो… और एक तुम हो
जब आप दुनिया में अपनी आइडेंटिटी को लेकर उड़ने लगें, और उसकी वैल्यू घर वालों को सिखाने चल पड़ें-

तीसरा टूल- हमने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया!
बड़ी हिम्मत करके जब आप मम्मी से कहें कि मेरी प्राइवेसी की कद्र कीजिए-

चौथा टूल– घर कैसे चलता है, जानते हो?
जब आप 18 साल की बाली उमर के उस पार जाने लगें –

पांचवां टूल- हमारे ज़माने में…
आप नौकरी की टेंशन बताएं, और परिवार उसे तुरंत संघर्ष का ओलंपिक बना दे—“हम पूरा साल बस एक जोड़ी कपड़े में काटते थे। तुम्हें क्या कमी है?”

लेखक के बारे में
- राकेश स्वामी आईडीआर में सह-संपादकीय भूमिका मे हैं। वह राजस्थान से जुड़े लेखन सामग्री पर जोर देते हैं। राकेश के पास राजस्थान सरकार के नेतृत्व मे समुदाय के साथ कार्य करने का एवं अकाउंटेबलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च मे लेखन एवं क्षमता निर्माण का भी अनुभव है। राकेश ने आरटीयू यूनिवर्सिटी, कोटा से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक किया है।
- पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
