अधिकार
नए पर्यावरण नियमों में खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट क्यों दी जा रही है?
बीते दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों का हवाला देते हुए सरकार ने यूरेनियम, लिथियम सहित कई महत्त्वपूर्ण खनिजों की खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट दे दी है।जल-जंगल-जमीन से जुड़ी शब्दावली में क्या-क्या शामिल है?
वन और पर्यावरण से जुड़े अधिकारों के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द, जो भारतीय वन अधिकार और अन्य कानूनों को समझने में मददगार हैं।यमुना खादर में बसे लोगों के जीवन और आजीविका पर कितनी तरह के खतरे हैं?
यमुना खादर में बसने और काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों का जीवन कभी बाढ़, कभी जमीन मालिक तो कभी विकास परियोजनाओं के चलते संकट में दिखता है।सूचना के अधिकार का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
आरटीआई अधिनियम का इस्तेमाल अक्सर राज्य स्तर के पोर्टल की सुगमता पर निर्भर होता है। प्रस्तुत हैं आरटीआई दाखिल करने के कुछ प्रभावी सुझाव, जिनसे व्यापक बदलावों की राह प्रशस्त हो सकती है।ई-केवायसी: भोजन के अधिकार की राह में खड़ी नई दीवार
राशन कार्ड के लिए ई-केवायसी प्रक्रिया में अस्पष्टता और इसकी असफलता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों की भोजन तक पहुंच को खतरे में डाल रही है।सुंदरबन में समुदाय द्वारा शिक्षा के लिए की गई एक सुंदर पहल
सुंदरबन के एक गांव में शुरू हुआ एक निशुल्क शिक्षा और देखभाल केंद्र जिसे समुदाय ने श्रमिक वर्ग के बच्चों के लिए शुरू किया है।भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में वंचित समुदायों की उपेक्षा
बिहार में कारावास की हकीकत आज भी जातीय भेदभाव और ढांचागत पक्षपात से प्रभावित है, जिसे समावेशी और न्यायपूर्ण बनाने के लिए बुनियादी बदलाव की जरूरत है।आईडीआर इंटरव्यूज | देविका सिंह
मोबाइल क्रेचेज की सह-संस्थापक देविका सिंह, प्रवासी मजदूरों के बच्चों के साथ अपने लंबे काम के अनुभव, एक चलती-फिरती देखभाल प्रणाली (मोबाइल केयर सिस्टम) बनाने और बच्चों की देखभाल से जुड़ी नीतियों में बदलाव लाने की कहानी साझा कर रही हैं।घरेलू हिंसा अधिनियम: न्याय के लिए बेहतर अमल की जरूरत
घरेलू हिंसा कानून ने कई महिलाओं को न्याय दिलाने में सहायता की है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता आज भी चुनौतियों से घिरी हुई है।संवाद से संरक्षण तक: एक महिला वन रक्षक का सहभागी अनुभव
उदयपुर, राजस्थान की एक महिला फॉरेस्ट गार्ड वन संरक्षण और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही हैं, उनके संघर्ष और अनुभवों के बारे में यहां पढ़िए।कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ लामबंद होती घरेलू कामगार महिलायें
एनसीआर में घरेलू कामगार महिलायें सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नियोक्ताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बना रही हैं।