अधिकार
घरेलू हिंसा अधिनियम: न्याय के लिए बेहतर अमल की जरूरत
घरेलू हिंसा कानून ने कई महिलाओं को न्याय दिलाने में सहायता की है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता आज भी चुनौतियों से घिरी हुई है।संवाद से संरक्षण तक: एक महिला वन रक्षक का सहभागी अनुभव
उदयपुर, राजस्थान की एक महिला फॉरेस्ट गार्ड वन संरक्षण और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही हैं, उनके संघर्ष और अनुभवों के बारे में यहां पढ़िए।कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ लामबंद होती घरेलू कामगार महिलायें
एनसीआर में घरेलू कामगार महिलायें सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए सरकार और नियोक्ताओं पर ठोस कदम उठाने का दबाव बना रही हैं।ज्ञान की राजनीति: संविधान और एनटी-डीएनटी समुदाय
एकपक्षीय प्रसार के कारण संवैधानिक ज्ञान अभी भी एनटी-डीएनटी समुदायों की पहुंच से बाहर है।कचरा बीनने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा का महत्व
बेंगलुरु में कचरा बीनने वाले श्रमिकों के साथ कार्यरत संगठनों के एक साझा समूह का मानना है कि सरकारी योजनाओं की सुलभता उनके जीवन में निर्णायक भूमिका निभाती है।बुंदेलखंड की चप्पल प्रथा: स्वाभिमान की कीमत पर सम्मान
बुंदेलखंड इलाके के ललितपुर जिले में आज भी चप्पल प्रथा कायम है जो दलित समुदाय खासकर, महिलाओं के लिए अपमान और असुविधा का कारण बन रहा है।आदिवासी समूहों की एकजुट पहल: जल और जमीन पर अधिकार की मांग
आदिवासी जनजातियां भू-अधिकारों और मत्स्य पालन को लेकर संगठित हो रही हैं, ताकि अपनी पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रख सकें।स्वास्थ्य और विकलांगता पर काम कर सशक्त होती पंचायतें
स्वास्थ्य क्षेत्र और विकलांगजन हित में काम करने से ग्राम पंचायतें प्रभावी और संवेदनशील बनती है, जिससे उनका सशक्तिकरण होता है।अंबेडकर की विचार यात्रा कहां से कहां तक जाती है
पुणे स्थित स्वतंत्र शोधकर्ता और लेखक अशोक गोपाल के साथ, हिंदी पॉडकास्ट पुलियाबाज़ी की बातचीत।आईडीआर से समझिए: वन अधिकार अधिनियम, 2006 (एफआरए)
वन अधिकार अधिनिमय, 2006 (एफआरए) से जुड़े चार सबसे जरूरी सवालों के जवाब जो इसके इतिहास, जरूरत, फायदों और चुनौतियों पर बात करते हैं।शहर में बेघर, ऊपर से ठंड का कहर
अक्सर शहरों को सुंदर बनाए जाने के दौरान बेघर लोगों से उनके अस्थाई आश्रय भी छीन लिए जाते हैं जो ठंड और बारिश में उनका जीवन और कठिन बना देता है।