जम्मू और कश्मीर
कश्मीर घाटी से क्यों गुम हो रहे हैं पारंपरिक धान के खेत और उनकी खुशबू?
परंपरागत रूप से चावल की खेती करने वाले किसान, सेब की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खेती की जमीनों पर बनते रिहाइशी और गैर-रिहाइशी इलाके भी धान के रकबे को घटा रहे हैं।संघर्ष से परे: कश्मीर के दर्द और जीवटता की कहानी
कश्मीर में दशकों से अशांति और हिंसा ने एक गहरी मानसिक वेदना को जन्म दिया है। कश्मीरी आवाम इससे कैसे जूझती है और इस दिशा में कौन से कदम उठाये जाने चाहिए?फोटो निबंध: पॉपलर की कमी से जूझता कश्मीर का ‘पेंसिल गांव’
कश्मीर का ओखू गांव भारत में पेंसिल की स्लैट का सबसे बड़ा उत्पादक है। पॉपलर वृक्षों की कटाई ने लकड़ी की आपूर्ति, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था—तीनों को संकट में डाल दिया है।संवेदनशील नेतृत्व: संघर्षशील परिवेश में भरोसे की नींव
राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में समुदाय के साथ जुड़ने की नींव विनम्रता, संवेदनशीलता और सुनने की क्षमता पर आधारित होनी चाहिए।कश्मीरी जनजातियों के सामने रोज़गार या शिक्षा में से एक को चुनने की दुविधा क्यों है?
मौसमी प्रवासन, कम आय और जाति-आधारित भेदभावों के चलते गुज्जर बकरवाल और चोपन जैसी कश्मीरी जनजातियों तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही है।