सामाजिक कार्यकर्ता
पंचायतों से जुड़ी संस्थाएं सरकारी पोर्टल्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
अगर कोई संस्था अपने फील्ड सर्वेक्षण, समुदाय की बातचीत या स्थानीय अनुभवों की तुलना सरकारी आंकड़ों से करती है, तो उसे क्षेत्र की स्थिति को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलती है।बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सरल कोश: इंटरसेक्शनैलिटी
इंटरसेक्शनैलिटी यानी किसी व्यक्ति की पहचान एक नहीं, कई पहलुओं से मिलकर बनती है। विकास सेक्टर में इंटरसेक्शनैलिटी जरूरी है, क्योंकि यह नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाती है।कॉन्वेंट में पढ़कर भी तुम्हें सोशल सेक्टर में काम करना है, क्यों?
ऐसे ही कुछ सवाल और प्रतिक्रियाएं जो मेरा परिवार मेरी विकास सेक्टर की नौकरी पर करता रहता है।समावेशी कॉन्फ्रेंस: एक ऐसा मंच, जहां हर आवाज सुनी जाए
असल समावेश एक तटस्थ मंजिल नहीं, बल्कि एक रास्ता है जो हर पल खुलता रहता है। कभी-कभी अच्छे इरादों से किए गए प्रयास पूरी तरह से सफल नहीं होते, लेकिन इससे हमें नए अनुभव और विचार सीखने को मिलते हैं।‘एक मैनेजर अपनी टीम को क्या-क्या नहीं दे सकता पर उसे चाहिए, बस छुट्टी!’
यह मैनेजर की डायरी पूरी तरह से काल्पनिक है और विकास सेक्टर में काम करने वाले उन तमाम मैनेजर्स को समर्पित है जो चाहे-अनचाहे अपनी टीम के सदस्यों की छुट्टियां मंज़ूर कर ही देते हैं।एक रिसर्चर को कैसे पहचानें?
तीन चित्र और तीन तरीक़े, जो बताते हैं कि ज़मीन पर रिसर्चर कैसे पहचाने जाते हैं।क्या आपका जामनगर से आई इन तस्वीरों से कोई वास्ता है… देखिए, शायद हो?
न तो जामनगर का मेहमान होना आसान बात है और ना ही सोशल सेक्टर में काम करना।