महाराष्ट्र
पेंच टाइगर रिज़र्व: फसलों और जानवरों के बीच रोशनी का पहरा
पेंच टाइगर रिज़र्व से सटे छह गांवों में सोलर लाइटें कुछ किसानों के लिए एक नयी उम्मीद बनकर आयी हैं। लेकिन अभी भी कई घर ऐसे हैं, जो बदलाव की बाट जोह रहे हैं।मिठास के पीछे का कड़वा सच: मराठवाड़ा के गन्ना मज़दूरों की कहानी
मराठवाड़ा एक सूखा-प्रभावित इलाका है जहां खेती भरोसेमंद नहीं है। सन 1950 के आस-पास अहमदनगर में पहली शुगर फैक्ट्री बनी थी और वहीं से एक नई मज़दूरी की कहानी शुरू हुई।जन आंदोलन लंबे समय तक कैसे जिंदा रहते हैं?
आंदोलन की असली ताकत सामुदायिक भागीदारी, जमीनी नेतृत्व और व्यापक गठबंधन होते हैं। छोटी-छोटी जीतों, अदालती आदेशों और नीतिगत बदलावों के बावजूद संघर्ष लगातार जारी रहता है।गांव की इन दाईयों को मामूली समझने की भूल न करना
ग्रामीण क्षेत्रों में दाईयों का महत्त्व और उनका अमूल्य ज्ञान एक सामाजिक धरोहर है, जिसे सहेजा जाना चाहिए।आदिवासी समूहों की एकजुट पहल: जल और जमीन पर अधिकार की मांग
आदिवासी जनजातियां भू-अधिकारों और मत्स्य पालन को लेकर संगठित हो रही हैं, ताकि अपनी पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रख सकें।रिवर फ्रंट: नदी, नियोजन और पर्यावरणीय सरोकार
किसी भी राज्य में रिवर फ्रंट से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत से पहले वहां की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय लोगों को भरोसे में लेना भी जरूरी है।साझेदारी से सफलता बुनती महिला उद्यमियों की कहानी
आशा और सना का उमंग से जुड़ने का सफर अलग-अलग था, लेकिन दोनों में एक बात समान थी - काम के प्रति उनका जुनून और मेहनत का जज्बा।