किसान
फोटो निबंध: मिलेट क्रांति की राह में क्या बाधाएं हैं?
मज़बूत लग रही सरकारी नीतियों के बावजूद, किसानों के पास मोटे अनाजों को उगाने, प्रोसेसिंग करने और उन्हें संग्रहित करने के लिए ज़रूरी सुविधाएं और समर्थन नहीं हैं।क्या सरकारी योजनाओं की परीक्षण-प्रक्रिया पर दोबारा विचार की ज़रूरत है?
भारत में पायलट प्रोजेक्ट के ज़रिए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन प्रक्रिया की व्यवहारिकता का आकलन किया जाता रहा है। यहाँ पीएम कुसुम योजना पर किसानों द्वारा मिलने वाली संभावित प्रतिक्रियाओं का पता लगाने के लिए एक एबीएम अभ्यास का आयोजन किया गया है।जिनसे हमें प्रेरणा मिलती है, उन किसानों को क्या मिलता है?
किसानों और मेहनतकशों को लेकर मीडिया की नज़र।जलवायु समस्या का हल मिल गया है!
राजस्थान में बारिश और बादल का तो नहीं, लेकिन बॉटल का पानी हर समय मिल सकता है।‘पानी बरसे आधा पूस, आधा गेंहू आधा भूस’
पर्यावरण पर भारतीय किसानों के परंपरागत ज्ञान की झलक दिखाती कुछ राजस्थानी कहावतें।