जलवायु परिवर्तन
ख़ुसरो काम क्लाइमेट का, उड़ गया संग अनार!
दिल्ली में दीवाली पर शुरू हुई पटाखों की धम-फटाक और उनका असर कई दिनों बाद भी जारी है। तो प्रस्तुत है हमारे साहित्यिक-सांस्कृतिक बुजुर्ग अमीर ख़ुसरो की शैली में कुछ मजेदार कह-मुकरियां।तीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।कन्नौज: जलवायु संकट से घिरी इत्र नगरी
बढ़ते तापमान के चलते कन्नौज में फूलों का उत्पादन कम हो गया है जो यहां के इत्र व्यापार और उससे मिलने वाले रोजगार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।छोटे समूह, बड़ी संभावनाएं: सीमांत किसानों की नयी दिशा
सामूहिक खेती से किसान कम जमीन मिलाकर खेती कर सकते हैं, उपज बढ़ा सकते हैं और गुजर-बसर की खेती से आगे बढ़ सकते हैं।जन गण वन
यह फिल्म झारखंड में वन संरक्षण और बहाली की दिशा में की गई सामुदायिक पहल को दिखाती है।जब तक सूरज-चांद रहेगा, किसका-किसका नाम रहेगा?
बड़ी घोषणाओं की जमीनी हकीकत में अक्सर विरोधाभास नजर आता है।क्या जस्ट ट्रांजिशन और आजीविका में कोई संबंध है?
कार्बन कॉपी के इस पॉडकास्ट में जानें कि भारत के कोयला सम्पन्न इलाकों में जस्ट ट्रांजिशन लोगों की आजीविका और जीवन को कैसे बदल सकता है।कैसे भीषण गर्मी की सबसे भारी मार गिग वर्कर्स, मजदूरों और बेघरों पर पड़ रही है
बढ़ती गर्मी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों की पड़ताल करते इस वीडियो में यह जानने का प्रयास किया गया है कि हीट एक्शन प्लान को न्यायसंगत और असरदार कैसे बनाया जा सकता है।नदियों की कहानी, समुदायों की ज़ुबानी : पूर्वोत्तर जनस्मृति का डिजिटल अभिलेख
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, नदी किनारे बसे समुदाय मेमोरी मैप्स, ऑडियो नोट्स और तस्वीरों के माध्यम से मौखिक इतिहास और पारंपरिक अनुकूलन रणनीतियों को संरक्षित कर रहे हैं।