युवा
युवाओं की ज़रूरतों को नहीं, उनकी इच्छाओं को समझना
एक युवा भारतीय केवल आमदनी के लिए रोज़गार नहीं चाहता है बल्कि वह स्वस्थ माहौल में ऐसा काम करना चाहता है जो उसके उज्जवल भविष्य की योजनाओं में मददगार हो।“युवाओं की आवाज़ सुनी जानी चाहिए”
जमशेदपुर के एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक के बारे में पढ़िये जो ट्रांसजेंडर, क्वीर और हाशिए पर जी रहे युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं।लड़कियाँ और महिलाएँ राजनीति में अपना करियर क्यों नहीं बनाना चाहती हैं?
भारतीय राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी दूर की कौड़ी है। चूँकि साल 2022 में पाँच राज्यों में और 2024 में आम चुनाव होने वाले हैं इसलिए ज़रूरी है कि हम ऐसे तरीक़े ढूँढें जिससे कि लड़कियाँ और महिलाएँ राजनीतिक प्रक्रियाओं में हिस्सा ले सकें।कौशल निर्माण: उपस्थिति से आगे की भागीदारी
अपने कार्यक्रम में युवाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के पाँच तरीके।“युवाओं की सुनें और उनसे सीखें”
नागालैंड के एक स्वयंसेवी संस्थान में काम करने वाली एक ऐसे प्रशिक्षक की दिनचर्या जो औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार के लिए आवश्यक कौशल सीखने में वहाँ के युवाओं की मदद करती है।