
इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू
इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू (आईडीआर) डेवलपमेंट कम्यूनिटी में काम कर रहे नेतृत्वकर्ताओं के लिए बना भारत का पहला स्वतंत्र मीडिया प्लैटफ़ॉर्म है। हमारा लक्ष्य भारत में सामाजिक प्रभाव से जुड़े ज्ञान का विस्तार करना है। हम वास्तविक दुनिया की घटनाओं से हासिल विचारों, दृष्टिकोणों, विश्लेषणों और अनुभवों को प्रकाशित करते हैं।
इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू के लेख
साल 2025 में हमने जो किताबें पढ़ीं, वे आपको भी क्यों पढ़नी चाहिए?
विकास सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कुछ किताबें जिन्हें पढ़ना और जिनसे सीखना आपके काम को थोड़ा और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।कृषि सरल कोशः इंडिजिनस सीड्स
इंडिजिनस सीड्स (पारंपरिक बीज) किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित बीज होते हैं। मौजूदा समय में विकास सेक्टर में इन्हें जलवायु सुरक्षा और सामाजिक बदलाव का आधार माना जाता है।सामाजिक न्याय सरल कोश: इंटरसेक्शनैलिटी
इंटरसेक्शनैलिटी यानी किसी व्यक्ति की पहचान एक नहीं, कई पहलुओं से मिलकर बनती है। विकास सेक्टर में इंटरसेक्शनैलिटी जरूरी है, क्योंकि यह नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाती है।सरल कोश: कोहोर्ट
इस सरल कोश में कोहोर्ट की शाब्दिक परिभाषा के साथ हम यह भी बताएंगे कि यह शब्द कहां से आया और विकास क्षेत्र में इसका प्रयोग किन संदर्भों में किया जाता है।पर्यावरण जलवायु परिवर्तन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
विकास सेक्टर के जमीनी कार्यकर्ता जलवायु परिवर्तन के असर से अछूते नहीं हैं, यह जीवन के साथ-साथ उनके काम की निरंतरता और प्रभावशीलता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।सामाजिक न्याय सरल कोशः पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली)
सरल-कोश के जरिए विकास सेक्टर से जुड़े नागरिक संगठनों के लिए कठिन अंग्रेजी शब्दों की सरल व्याख्या - पीडीएस।ग्रामदान की वर्तमान चुनौतियां और कानूनी उलझनें
हमारे देश में ग्रामदानी व्यवस्था पचास वर्षों से भी ज्यादा पुरानी है। लेकिन जो गांव उस दौर में ग्रामदान को स्वीकार कर चुके थे, वे अब उससे पीछे हटना चाहते हैं।सरल कोश: कन्वर्जंस
कन्वर्जंस यानी साझा प्रयास—जहां योजनाएं, संस्थाएं और लोग मिलकर एक ही लक्ष्य के लिए काम करते हैं। इस एपिसोड में जानिए यह विकास सेक्टर में कैसे प्रभाव बढ़ाता है।स्केल इम्पैक्ट स्केलिंग: काम का प्रभाव बढ़ाने की एक कुंजी
सरकार के साथ साझेदारी से लेकर मुक्त संसाधन बनाने तक, कई संस्थाओं ने प्रभाव बढ़ाने के नए रास्ते खोजे हैं। एक नई रिपोर्ट उनकी अहम सीख साझा करती है।जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें?
जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अपने काम की पहुंच व्यापक बना सकती हैं।सरल कोश: स्पेशल एजुकेशन
अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - स्पेशल एजुकेशन।सरल कोश: फ्रंटलाइन वर्कर
फ्रंटलाइन वर्कर किसी दफ्तर या मीटिंग रूम तक सीमित नहीं होते, बल्कि गांवों, मोहल्लों और बस्तियों में जाकर समुदायों के साथ काम करते हैं।











