ग्रामीण भारत

क्या विज्ञान अंधविश्वास का पर्दाफाश कर सकता है?

सरायकेला-खरसावां ज़िला, झारखंड
एक व्यक्ति स्कूली छात्रों की सभा को संबोधित करते हुए_अंधविश्वास
वैज्ञानिक सोच का विकास केवल विज्ञान पढ़ाने से नहीं, बल्कि सवाल पूछने की आदत को प्रोत्साहित करने से होता है। | चित्र साभार: आरम्भ युवा मंच

झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में ग्रामीण और आदिवासी समुदायों के साथ काम करने के दौरान हमने देखा कि बच्चों में अंधविश्वास की जड़ें बचपन से ही पनपने लगती हैं। वे अपने आसपास जो देखते और सुनते हैं, उसे ही सच मान लेते हैं। अगर कोई व्यक्ति किसी करतब को चमत्कार बताकर पेश करता है, तो उसके पीछे का विज्ञान जानने का मौका उन्हें शायद ही कभी मिलता है।

इस विषय को लेकर हमारे संगठन ‘आरंभ युवा मंच’ ने 18 मई को सरायकेला-खरसावां ज़िले के चांडिल प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, शहरबेड़ा और 19 मई को उत्क्रमित उच्च विद्यालय कल्याणपुर, चिल्गु में बच्चों के बीच ‘अंधविश्वास का पर्दाफाश’ नाम का कार्यक्रम आयोजित किया। इन दोनों स्कूलों में कुल मिलाकर 400 से भी अधिक बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

इस कार्यक्रम को लेकर शुरुआत से ही बच्चों के चेहरे पर उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। मंच पर हरियाणा विज्ञान मंच के वरिष्ठ विज्ञान संचारक ईश्वर नास्तिक और सुभाष अनुराग मौजूद थे। ये दोनों ही विज्ञान संचारक, वर्षों से देशभर में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार का काम कर रहे हैं। 17 से 24 मई के बीच वे चांडिल प्रखण्ड के चिल्गु चाकुलिया गांव स्थित सोबरन स्मृति शिक्षापीठ में आयोजित किए गए विज्ञान समर कैंप का हिस्सा रहे, जहां यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में बच्चों के सामने ऐसे प्रदर्शन किए गए, जिन्हें देखकर किसी भी व्यक्ति को आश्चर्य हो सकता है। जैसे, आग को खा जाना, जीभ के आर-पार त्रिशूल निकालना, मंत्रों से आग पैदा करना, अग्नि स्नान करना या छलनी में पानी रोक देना आदि। ये सभी ऐसे करतब थे जिन्हें अक्सर फर्ज़ी चमत्कारी बाबा अपनी अलौकिक शक्तियों का प्रमाण बताकर प्रस्तुत करते हैं। इन करतबों को देखकर बच्चों की आंखों में हैरानी साफ दिख रही थी और वे बार-बार एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा रहे थे।

लेकिन कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा करतबों के बाद शुरू हुआ, जब बच्चों को एक-एक कर हर प्रयोग के पीछे का वैज्ञानिक कारण समझाया गया। बच्चों ने जाना कि जिन चीज़ों को वे अब तक चमत्कार समझते आए हैं, उनके पीछे विज्ञान के सामान्य सिद्धांत काम करते हैं। उन्हें पृष्ठ तनाव, गुरुत्व केंद्र और रासायनिक प्रतिक्रियाओं जैसे विषयों को किताबों की भाषा में नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव के ज़रिए समझाया गया।

इस पूरे कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि बच्चों को केवल मूक दर्शक बनाकर नहीं रखा गया। उन्हें मंच पर बुलाया गया और कई प्रयोग स्वयं करने का मौका दिया गया। शुरू में वे थोड़ा झिझक रहे थे, लेकिन कुछ देर बाद कई बच्चे उत्साह के साथ हाथ उठाने लगे। कई प्रयोगों को चमत्कार मानने वाले बच्चों ने जब खुद उनमें हाथ आज़माया, तो उनके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।

कार्यक्रम में कुछ मनोवैज्ञानिक प्रयोग भी किए गए। इनके माध्यम से बच्चों को समझाया गया कि किस तरह भ्रम, सुझाव और मनोवैज्ञानिक प्रभावों का इस्तेमाल करके लोगों को प्रभावित किया जा सकता है। इस चर्चा के दौरान कई बच्चों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कुछ ने गांवों में आने वाले बाबाओं का ज़िक्र किया, तो कुछ ने ऐसी घटनाओं के बारे में बताया जिन्हें वे पहले अलौकिक मानते थे।

उस दिन हमारा यह यकीन एक बार फिर पुख्ता हुआ कि वैज्ञानिक सोच का विकास केवल विज्ञान पढ़ाने से नहीं, बल्कि सवाल पूछने की आदत को प्रोत्साहित करने से होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई केवल गलत मान्यताओं को खारिज करने की नहीं है, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, तर्क और आत्मविश्वास विकसित करने की भी है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कई बच्चे मंच के पास आकर प्रयोगों के बारे में और सवाल पूछने लगे। उनके सवालों में जिज्ञासा तो थी ही, लेकिन उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण यह था कि वे अब बिना झिझक सवाल पूछ रहे थे। हमारे लिए यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता थी।

आरंभ युवा मंच झारखंड के कोल्हान क्षेत्र के जागरूक युवाओं का एक जन संगठन है। यह संगठन बीते 10 वर्षों से कोल्हान क्षेत्र में स्कूली बच्चों और युवाओं के साथ नेतृत्व विकास, नागरिक अधिकार, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहा है।

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अधिक करें: विकास कुमार और आरंभ युवा मंच के काम के बारे में और जानने और उन्हें सहयोग करने के लिए [email protected] ईमेल आईडी पर उनसे संपर्क किया जा सकता है।

लेखक के बारे में

  • विकास कुमार मूल रूप से वाइजैग (विशाखापट्टनम), आंध्र प्रदेश से हैं। उनकी स्कूली शिक्षा झारखंड के जमशेदपुर में हुई और उन्होंने बैंगलोर की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क में परास्नातक की डिग्री (एमएसडब्ल्यू) प्राप्त की है। वे पिछले आठ वर्षों से ‘आरंभ युवा मंच’ के साथ जुड़े हुए हैं तथा झारखंड में स्कूली बच्चों और युवाओं के साथ नेतृत्व विकास, नागरिक अधिकार, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता से काम कर रहे हैं। वे घुमंतू पुस्तकालय, संविधान यात्रा और विज्ञान फिल्म क्लब जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं और समुदायों के बीच संवाद, सीखने की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूत करने के प्रयासों से भी जुड़े रहे हैं।