संगठनात्मक संस्कृति
विकास सेक्टर में नेतृत्व परिवर्तन: कब, क्यों और कैसे?
सामाजिक संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है। यह प्रकिया व्यक्ति और संस्था, दोनों के बीच आकार लेती है। नेतृत्व की पहचान के लिए संस्था को बहुत धैर्य और खुले विचारों के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।कला में निवेश है सामाजिक बदलाव की कुंजी
भारत के विकास सेक्टर में कला की भूमिका केवल कुछ प्रयासों तक सीमित है। यह स्थिति क्यों बदलनी चाहिए और फंडर कैसे दिखा सकते हैं एक नयी राह?सामाजिक क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत में काम करने के बारे में क्या सीखना चाहिए?
साथ ही जानिए, क्यों समाजसेवियों और फंडर्स को पूर्वोत्तर भारत के लिए सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कार्यक्रम बनाने से पहले वहां के स्थानीय संदर्भों को समझ लेना चाहिए।समाजसेवी संगठन में विविधता, समानता और समावेशन कैसे शामिल करें?
समाजसेवी संगठन में विविधता, समानता और समावेशन (डीईआई) जैसे प्रमुख तत्वों को लेकर प्रतिबद्धता भर काफ़ी नहीं है बल्कि उन्हें संगठन के मूल तत्वों में बदले जाने की ज़रूरत है।सरल-कोश: इंटरनल कम्युनिकेशन
अंग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश - विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल शब्दावली।संगठनात्मक संस्कृति प्रतिभावान कर्मचारियों को रोकने में कैसे मददगार है?
आईएसडीएम और अशोका यूनिवर्सिटी के सीएसआईपी का यह अध्ययन बताता है कि जन-केंद्रित संस्कृति और काम के लिए सहयोगी वातावरण मुहैया करवाने वाले संगठन प्रतिभाओं को हासिल करने और रोके रखने में सफल होते हैं।