हल्का-फुल्का

बूझो तो जानें: विकास सेक्टर की कुछ मजेदार पहेलियां 

इन पहेलियों में सिर्फ विकास सेक्टर के लोग नहीं बल्कि कुछ जाने पहचाने शब्द और अवधारणाएं भी छुपी हैं, आइए देखें आप किन-किन को पहचान पाते हैं।
बूझो तो जानें: विकास सेक्टर की कुछ मजेदार पहेलियां 

1.   

बैंक इनके होते नहीं, पर पैसा इनसे सबको मिलता

इनके कुछ भी किए बगैर, जाने क्या-क्या प्रोजेक्ट चलता 

हम तो बोलें -दुनिया रूठे या कुछ भी छूटे, बस ये रिश्ता टूट ना पाय

बताओ हैं कौन वो, जिनके आगे हमेशा गर्म रहती हमारी चाय और राय  

फिल्म रईस के एक दृश्य में शाहरूख खान_पहेलियां
पहेली का उत्तर जानने के लिए आखिर तक जाएं। 

2.  

हमेशा कम ही पड़ता हूं, पर खूब उम्मीदें देता हूं

मेरे हिलते ही, हिल जाते हैं टीम के इरादे 

प्रोजेक्ट हो या फील्ड विजिट सबका कर्ता धर्ता हूं 

बताओ कौन हूं मैं, जिसे संभालकर खर्चने की सब सलाह दें  

गंभीर भाव में सिक्का पकड़े अभिनेता रजनीकांत_पहेलियां
पहेली का उत्तर जानने के लिए आखिर तक जाएं।

3. 

सब गुस्सा हो जाते हैं, अगर मैं मोबाइल में जगह हूं खाता 

बिन खोजे, बिन जोड़े मुझको कोई रिपोर्ट नहीं बना पाता 

मैं सही हूं तो हीरो और गलत तो जीरो, सारा इल्जाम मुझ पर आता 

बताओ कौन हूं मैं, जो सबके काम आता पर समझ कोई नहीं पाता  

फिल्म शकुंतला देवी के दृश्य में अभिनेत्री विद्या बालन_पहेलियां
पहेली का उत्तर जानने के लिए आखिर तक जाएं।  

4.  

ना पोस्टर हूं, ना ईमेल, ना सोशल मीडिया की रील 

पर जब रास्ता बताऊं, तभी बनती है सबकी फील 

गलत हो जाऊं बात उल्टी पड़ जाए, करना न कभी ढील 

सही हुआ तो एक छोटा लफ्ज भी दिलों को करता है अपील  

फिल्म द लंचबॉक्स के एक दृश्य में निमरतकौर और इरफान चिट्ठी पढ़ते हुए_पहेलियां
पहेली का उत्तर जानने के लिए आखिर तक जाएं।  

5.  

न तनख्वाह की गारंटी, न कोई गिनती छुट्टी की  

फिर भी हर मीटिंग में रहती है हाजिरी पक्की। 

तालियां मिलें तो खुश हो जाएं, चाय-बिस्किट में कर लें काम, 

सेवा, जोश और थकान है इनकी पहचान, 

बताओ ये कौन हैं, जिनसे चलता है पूरा अभियान 

फिल्म के एक दृश्य में बरामदे में बैठे लोग चाय पीते हुए आपस में बातचीत कर रहे हैं, एक व्यक्ति ट्रे में चाय परोस रहा है।_पहेलियां

उल्टे अक्षरों में लिखें कुछ शब्द_पहेलियां

लेखक के बारे में

  • आशिका शिवांगी सिंह एक स्वतंत्र लेखिका हैं। आशिका, मानवाधिकार, जाति, वर्ग, लिंग, संस्कृति आदि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सामाजिक राजनीतिक नज़रिए से लिखती रहती हैं। इनके लेख फेमिनिज्म इन इंडिया, ब्राउन हिस्ट्री और बहनबॉक्स पर प्रकाशित हो चुके हैं। वे रचनात्मक और विश्लेषणात्मक लेखन कौशल के साथ-साथ ठोस निर्णय लेने की क्षमता, निरंतर सीखने की उत्सुकता और अपने काम के प्रति गहरा समर्पण रखती हैं। इनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड में जूरी सराहना प्रशस्ति के साथ मान्यता मिली है।
  • सिद्धार्थ आईडीआर में एडिटोरियल एसोसिएट हैं। इससे पहले वे यूथ की आवाज़ हिन्दी और युवानिया जैसे डिजिटल प्लैटफॉर्म्स के साथ संपादकीय भूमिका में काम कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने जनसंगठनों के साथ काम करने वाली संस्था श्रुति के साथ लंबे समय तक काम किया है।