कानून
आखिर क्यों विवादों के घेरे में है ट्रांसजेंडर बिल?
नया ट्रांस संशोधन विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को कमजोर कर सकता है। इसमें आत्म-पहचान और कानूनी सुरक्षा पर सीमाएं लगाने की आशंका जतायी जा रही है। इस कारण कई एक्टिविस्ट और विशेषज्ञ इसे बड़े स्तर पर अधिकारों का हनन ठहरा रहे हैं।सरल कोश: एंटाइटलमेंट
एंटाइटलमेंट का अर्थ सिर्फ एक शब्द की समझ तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि अधिकार कैसे पहचाने जाएं और उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया क्या है।क्या मनरेगा की खामियों को भर पाएगा वीबी-जी राम जी?
केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा एक अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है। ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?भारत में थैरेपिस्ट प्रशिक्षण में क्वीयर अनुभवों की अनदेखी
क्वीयर-अफर्मेटिव मानसिक स्वास्थ्य सेवा इतनी दुर्लभ क्यों हैं? क्योंकि मनोविज्ञान की शिक्षा में क्वीयर अनुभव अब भी केंद्र में नहीं, हाशिए पर है।जातिवाद और कच्ची नौकरियों से जूझते भारत के सफाई कर्मचारी
शहरी भारत में स्वच्छता सेवाओं के निजीकरण के साथ जातिवाद की जड़ें, मजदूरी में कटौती, और दलित कामगारों पर सामाजिक संकट गहराते जा रहे हैं।भारत की पंचायती राज व्यवस्था की स्थिति
पंचायती राज मंत्रालय ने “स्टेटस ऑफ डीवोल्यूशन टू पंचायत्स इन स्टेट्स-एन इंडिकेटिव एविडेंस बेस्ड रैंकिंग” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट विभिन्न संकेतकों के आधार पर यह आकलन करती है कि राज्यों ने पंचायतों को स्वशासी संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए कितना सक्षम वातावरण तैयार किया है।झारखंड के पेसा नियम, मूल नियमों से कितने अलग हैं?
झारखंड पेसा नियमावली, 2025 का धारा दर धारा विश्लेषण।कॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है
सामुदायिक संसाधनों पर चर्चा और जागरुकता बनाए रखने के लिए ग्राम-सभाओं को सशक्त बनाना और उनके एजेंडे को कॉमन्स और समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित करना जरूरी हो गया है।संवेदनशील विषयों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किस तरह के सहयोग की दरकार है?
संवेदनशील विषयों पर काम करने वाली संस्थाओं से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत, पेशेवर और मानसिक स्तरों पर सहयोग और प्रशिक्षण की जरूरत होती है, इनकी पहचान और समाधान से जुड़े कुछ सुझाव।नए पर्यावरण नियमों में खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट क्यों दी जा रही है?
बीते दिनों राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक जरूरतों का हवाला देते हुए सरकार ने यूरेनियम, लिथियम सहित कई महत्त्वपूर्ण खनिजों की खनन परियोजनाओं को जनसुनवाई से छूट दे दी है।संघर्ष से परे: कश्मीर के दर्द और जीवटता की कहानी
कश्मीर में दशकों से अशांति और हिंसा ने एक गहरी मानसिक वेदना को जन्म दिया है। कश्मीरी आवाम इससे कैसे जूझती है और इस दिशा में कौन से कदम उठाये जाने चाहिए?गिग कामगारों को बुनियादी अधिकार देने वाले कानूनों की राह इतनी कठिन क्यों है
लंबे समय तक एडवोकेसी और संघर्ष के बाद बने कानूनों से कई राज्यों में गिग और प्लेटफार्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन तो मिला है लेकिन इतना भर होना काफी नहीं है।