हल्का-फुल्का

क्योंकि पेड़ बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है पेड़ लगाने की फोटो!​

पेड़ लगाने के ​​अभियान ​​अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं​​​​​, लेकिन पेड़ों और जंगलों को बचाने की ​​​​ज़ि​​म्मेदारी ​​नज़रअंदाज़​​​​​ कर दी जाती है।
मंच पर महिला को पुरस्कृत करते हुए मंत्री_पर्यावरण दिवस

पत्रकारों से बात करती हुई महिला_पर्यावरण दिवस

​​नोट: हल्का-फुल्का का यह अंक एक सत्य घटना पर आधारित है। ​

​​इलस्ट्रेशन साभार: ​​ईशानी मोदी

लेखक के बारे में

  • पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
  • सृष्टि गुप्ता आईडीआर में एडिटोरियल एसोसिएट हैं और लेखन, सम्पादन और अनुवाद से जुड़े काम करती हैं। इससे पहले सृष्टि ने स्प्रिंगर नेचर के साथ संपादकीय काम किया है। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एम ए किया है और लिंग, सामाजिक न्याय, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अध्य्यन करने में रुचि रखती हैं।