सामाजिक संस्था
कुच्चू-पुच्चू! सस्ता ऑफिस स्पेस बता दो ना…
आजकल शहर में ऑफिस ढूंढना संस्था की ज़रूरत बन गया है। दुख बस इतना है कि उसका किराया भरने के लिए एक नया फंडर भी ढूंढना पड़ता है।हम वैसे नहीं, तो ऐसे कह देते हैं!
सीधे-सीधे बोलना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है… इसलिए हम मुहावरों में कह देते हैं।जिंगल बेल… जिंगल बेल… इज़ द फंडिंग वेल?
इस क्रिसमस एनजीओ ने भी अपनी विश लिस्ट निकाली है! इनके सैंटा कोई और नहीं, बल्कि फंडर्स ही हैं।