हंसते हुए को रुलाएं: नुस्खे एनजीओ वाले
सामाजिक क्षेत्र में बदलाव की कोशिशों के बीच उलझनों, उम्मीदों और ‘इम्पैक्ट’ की दुनिया पर एक व्यंग्य।
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पूर्वोत्तर में काम करने वाले सोनल रोशन जैसे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फील्ड में काम के दौरान एक किस्सा बहुत सुना है।
अन्वेषा गांगुली के चित्रांकन से जानिए कि आखिर ये माजरा क्या है!



लेखक के बारे में
- सोनल रोशन वर्तमान में बॉस्को इंस्टीट्यूट के साथ 'यूथ इनवॉल्व सोशल एंटरप्रेन्योर सपोर्ट' प्रोजेक्ट में कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पूर्वोत्तर में जमीनी स्तर के संगठनों को विकसित करना है। इसके अलावा सोनल असम में समाजसेवी संस्थाओं तथा अन्य हितधारकों के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई को बढ़ावा देने वाली संस्था एक्सोम स्टेट कलेक्टिव में स्टेट मैनेजर के रूप में भी कार्यरत हैं।
- अन्वेषा गांगुली एक इलस्ट्रेटर हैं। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स और परियोजनाओं पर काम किया है, जिनमें हैशेट इंडिया जैसे प्रकाशकों के साथ पुस्तकों पर किया गया काम भी शामिल है।
