पर्यावरण

मिजोरम में शिकार की परंपरा को चुनौती देता एक बर्डवॉचिंग फेस्टिवल

जंगल में हाथ में कैमरा लिए खड़े तीन फोटोग्राफर_संरक्षण
2 मार्च 2026 को प्रकाशित

मिजोरम में झूम खेती के दौरान पहले जंगल साफ किए जाते हैं और फिर सूखी वनस्पतियों को जलाकर ऐसी राख तैयार की जाती है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाती है। इन दोनों गतिविधियों के बीच एक छोटा-सा अंतराल होता है, जब खेतों में कोई काम नहीं होता। यह समय पौधों और झाड़ियों को पूरी तरह सूखने का मौका देता है, ताकि वे बाद में अच्छी तरह जल सकें।

स्थानीय रूप से इस विश्राम अवधि को ‘चापचार अवल्लेन’ कहा जाता है। यह हमारे वसंत उत्सव ‘चापचार कुट’ के आसपास का समय होता है, जब लोगों में सामुदायिक उत्साह और मेल-मिलाप भी देखने को मिलता है। रीतियों के अनुसार, इस अवधि में पक्षियों और जंगली जानवरों के लिए जाल बिछाकर रखा जाता था, ताकि उनका शिकार किया जा सके।

वर्ष 2021 में ‘कंजर्वेशन मिजोरम’ नामक एक आत्म-वित्तपोषित गैर-लाभकारी संस्था से जुड़े वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ताओं के एक समूह ने चापचार आवल्लेन के दौरान शिकार की इस परंपरा को नए दृष्टिकोण से देखने की शुरुआत की। इसी सोच से ‘चापचार आवल्लेन सावा छिआरपुई (सीएससी)’ की शुरुआत हुई, जिसका सरल अर्थ है—‘झूम के सूखने के दौरान नागरिक भागीदारी से पक्षियों की गिनती करना।’

हर वर्ष आइजोल के साइलाम बर्ड सैंक्चुअरी में आयोजित होने वाला सीएससी एक सप्ताह तक चलने वाला एक पक्षी गणना अभियान है। यह फरवरी के अंतिम दिनों से शुरू होकर मार्च की शुरुआत तक चलता है। इसका खर्च संस्था के सदस्यों और सहयोगियों द्वारा उठाया जाता है। हम बाहरी वित्तीय एजेंसियों से दूरी बनाए रखते हैं, क्योंकि हम नहीं चाहते कि वे हमारे उद्देश्यों को निर्धारित करें या हमारे शोध कार्य में दखलअंदाजी करें।

हम इस आयोजन की जानकारी व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए साझा करते हैं। इसके अलावा, हम जैव विविधता संरक्षण से जुड़े प्रमुख लोगों को व्यक्तिगत निमंत्रण भेजते हैं और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली सभी गैर-लाभकारी संस्थाओं को औपचारिक आमंत्रण देते हैं। हमारे सदस्यों के यूट्यूब चैनलों पर पिछले आयोजनों के वीडियो भी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से कई लोग हमारे काम से परिचित होते हैं।

इस कार्यक्रम में आमतौर पर शोधकर्ता, विद्यार्थी, शिक्षक, बर्डवॉचर, फोटोग्राफर और वन्यजीव प्रेमियों का एक समर्पित लेकिन छोटा समूह भाग लेता है। प्रतिभागियों को पक्षियों की एक सूची और चित्रों सहित सरल फील्ड गाइड दी जाती है। फिर वे अपने-अपने इलाकों में जाकर पक्षियों पर नजर रखते हैं और उनकी दिखने वाली प्रजातियों का विवरण दर्ज करते हैं। बाद में यह सूची सीएससी के आयोजन सचिव तक पहुंचाई जाती है। हमारी टीम के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहते हैं, ताकि वे गिनती में लोगों की मदद कर सकें और विशेष रूप से पहली बार भाग लेने वालों का मार्गदर्शन कर सकें।

पहले वर्ष हमने आइजोल, कोलासिब और लॉन्गतलाई जिलों में यह पहल शुरू की थी। बाद में इसका दायरा लुंगलेई और चंपाई तक बढ़ाया गया। इस दौरान हम स्कूलों और स्थानीय चर्चों के साथ भी मिलकर काम करते हैं। दूरदराज के गांवों में जैव विविधता से जुड़े अभियान आयोजित किए जाते हैं, ताकि सीएससी की सोच और उद्देश्य को संवाद और सहभागिता के माध्यम से समुदायों तक पहुंचाया जा सके।

हम बर्डवॉचिंग को संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी साधन के रूप में देखते हैं। जैसे-जैसे लोगों की भागीदारी बढ़ी है और कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ है, हम पहले से कहीं ज्यादा प्रजातियों की पहचान करने में सफल रहे हैं। वर्ष 2021 में 195 प्रजातियां दर्ज की गई थी, जबकि वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 273 हो गई।

फिर भी, केवल सामुदायिक प्रयास काफी नहीं हैं। व्यवहार में स्थायी बदलाव के लिए सरकारी नियमों और नीतियों का सहयोग भी जरूरी है। आज शिकार को बढ़ावा देने वाले कई अन्य कारण मौजूद हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि फायरआर्म और एयर राइफलों तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है—फिर चाहे हथियार लाइसेंसशुदा हों या देसी । इनका उपयोग मुख्यतः पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के शिकार में होता है। जब तक इस पर सख्ती से नियंत्रण नहीं होगा, तब तक बड़े पैमाने पर बदलाव लाना मुश्किल है।

ललओमोईया साइलो एक संरक्षणवादी और फ्रीलांस इकोलॉजिस्ट हैं, तथा कंजर्वेशन मिजोरम के सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

जैसे मालसॉमदॉन्गलिआनी तारा, आईडीआर नॉर्थ-ईस्ट फेलो 2025-26 को बताया गया।

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