अप्रैल 21, 2022

हमें फील्ड कार्यकर्ताओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देने की जरूरत क्यों है

फील्ड में काम करने वाले हमारे कार्यकर्ताओं के कौशल और डिजिटल साक्षरता को बेहतर बनाना उनके लिए, संगठन के लिए और व्यापक स्तर पर सामाजिक क्षेत्र के लिए उपयोगी है।
6 मिनट लंबा लेख

कोविड-19 और उसके बाद लगने वाले लॉकडाउन ने कंपनियों और संगठनों के काम करने के तरीके को बदल दिया है। इन संगठनों में सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठन भी शामिल हैं। एक तरफ उनमें से कुछ संगठनों ने अपने मुख्य कार्यक्रमों का ध्यान राहत प्रयासों की तरफ किया है जिनसे उनके पहले से मौजूद संसाधनों को विस्तार मिला है। वहीं ज़्यादातर संगठनों को दूरस्थ कार्य मॉडल (रिमोट वर्किंग मॉडल) की दिशा में जाना पड़ा। इस प्रक्रिया ने क्षेत्र के भीतर व्याप्त सीमित डिजिटल कौशल एवं क्षमताओं और उन्हें मजबूत करने की जरूरत पर प्रकाश डाला है। इससे भी बड़ी बात यह है कि आज के इस रिमोट वर्किंग वास्तविकता में तकनीक और आंकड़े-संबंधी भूमिकाएँ बहुत ही आवश्यक बन गई हैं। हालांकि पूर्ति के सापेक्ष तकनीकी रूप से प्रशिक्षित प्रतिभा की मांग बढ़ने से इन भूमिकाओं के लिए उम्मीद किए जाने वाले वेतनों में वृद्धि हुई है। और इसलिए सीमित बजट वाले ज़्यादातर सामाजिक उद्यमों के लिए नई प्रतिभा की नियुक्ति करना लगभग असंभव हो गया है।  

क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए डिजिटल क्षमता और बुनियादी ढांचे में निवेश महामारी के पहले की तुलना में अब बातचीत का और अधिक महत्वपूर्ण बिन्दु बन चुका है। इसलिए सामाजिक उद्यमों को प्रशिक्षण और विकास प्रारूपों की मदद से अपने कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत है जो न केवल कौशल की कमी को भरने में मददगार साबित होते हैं बल्कि पहले से मौजूद प्रतिभा को बनाए रखने में भी मदद करते हैं। यह सिर्फ मुख्यालय में काम कर रहे कर्मचारियों पर ही लागू नहीं होता है बल्कि फील्ड में काम करने वाले उन कर्मचारियों पर भी होता है जिनका काम संगठन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का कौशल विकास करके संगठन के भीतर ही क्षमता का निर्माण करना

सामाजिक क्षेत्र में हमारी ज़्यादातर भूमिका संचालन में होती है, जो हमें फील्ड में काम कर रहे कई कर्मचारियों से बातचीत का मौका देती हैं। हम लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षा की बढ़ती हुई भावना का अहसास किया है। इस क्षेत्र में काम कर रहे ज़्यादातर फील्ड कर्मचारी कार्यकाल-आधारित होते हैं और एक विशेष कार्यक्रम तक सीमित होने के कारण जमीनी स्तर पर काम करने वाले पेशेवर लगातार अपने इस समयावधि की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता में रहते हैं। उन्हें अक्सर उस संगठन के रोजाना के संचालन से भी बाहर रखा जाता है जिसमें वे काम करते हैं। इसलिए नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के ही अंदर अपनी क्षमता निर्माण से जुड़ी किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं होता है क्योंकि वे खुद को एक परियोजना से परे नहीं देख पाते हैं। यह फील्ड में काम कर रहे लोगों की प्रतिबद्धता और प्रेरणा के स्तर को प्रभावित कर सकता है जिसके कारण कार्यक्रम को बेहतर बनाने की दिशा में उनके निवेश के स्तर पर भी असर पड़ सकता है। यह समझने योग्य बात है कि  कई लोग संभवत: अपनी संविदात्मक ज़िम्मेदारी से परे संगठन से अपना जुड़ाव महसूस नहीं करते हैं।

फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर किसी क्षेत्र के लिए कौशल विकास जरूरी है क्योंकि इससे वे अगली परियोजना के लिए अधिक कुशल होते हैं।

हालांकि, फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को अस्थाई संविदा या सलाहकारों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि इन्हें ऐसे लोगों की तरह देखा जाना चाहिए जो एक संगठन के दायरे में हैं, ताकि वे अपने कौशल का विकास कर सकें और आगे अपना करियर बेहतर बना सकें। हमारे द्वारा नेतृत्व किए जाने वाले संगठन हकदर्शक में वे अंतिम स्तर पर काम करने वाले एजेन्टों के रूप में मुख्य भूमिका निभाते हैं और सरकारी योजनाओं और नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करते हैं। सामाजिक उद्यमों के लिए वे जमीन पर काम करने वाले उनके आँख और कान की भूमिका निभाते हैं। उनके ज्ञान और अंतरदृष्टि से संगठन को समुदायों की वास्तविक-समय की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है। फील्ड में काम करने वाले लोग मौजूदा कार्यक्रमों पर लगातार अपनी मूल्यवान प्रतिक्रियाएँ देते रहते हैं। फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर किसी क्षेत्र के लिए कौशल विकास जरूरी है क्योंकि इससे वे भविष्य में आगे काम करने वाली परियोजनाओं के लिए अधिक कुशल हो जाते हैं। इसके अलावा, सरकार अब भी कोविड-19 राहत और पुनर्वास प्रयासों में सहायता के लिए सामाजिक क्षेत्रों पर ही भरोसा करती है। इसलिए फिजिकल डिस्टेन्सिंग और रिमोट वर्किंग वाली मिश्रित व्यवस्था में फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों का कौशल विकास जरूरी हो गया है।

फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के क्षमता निर्माण के बारे में कैसे सोचें

अपने कार्यक्रमों को अनुकूलित करें और डिजिटल साक्षरता का अनुमान न लगाएँ

अपने अनुभवों से हमनें यह सीखा कि लोगों की योग्यता, उनकी जरूरतों और उनकी भूमिकाओं के लिए आवश्यक कौशल निर्माण कार्यक्रमों को विकसित करना जरूरी है। हम शहरी और ग्रामीण समुदाय के स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करते हैं जिन्हें हम हकदर्शक्स कहते हैं—ये हकदर्शक ऐप पर आपको आपके अधिकारों के बारे में बताते हैं। यह ऐप उन्हें समुदायों के लिए योग्य कल्याण सेवाओं को ढूँढने में मदद करता है। यह उनके लिए सहायता प्रणाली भी मुहैया करवाता है ताकि वे सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन में और उनके अधिकारों और लाभों को हासिल करने में उनकी मदद कर सकें। इन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का भुगतान या तो हमलोग करते हैं या वह नागरिक सेवा शुल्क के रूप में उन्हें एक छोटी सी राशि देता है जिसकी वे मदद करते हैं।

महिला को गुलाबी पर्ची दिखाते हुए हकदर्शक (एक संगठन) की फील्ड वर्कर-फ़ील्ड कार्यकर्ता कौशल विकास
लोगों की योग्यता, उनकी जरूरतों और उनकी भूमिकाओं के लिए आवश्यक कौशल निर्माण कार्यक्रमों को विकसित करना जरूरी है। | चित्र साभार: सौम्या खंडेलवाल

आज हमारे पास 330 पूर्णकालिक कर्मचारी हैं जिनमें 210 लोग फील्ड में काम कर रहे हैं और इनके अलावा 10,000 हकदर्शक्स भी हैं। हमारा काम करने का मॉडल जमीनी स्तर पर सरकारों और समुदायों के मध्य जानकारियों की कमी को तकनीक के माध्यम से कम करना है। इसलिए फील्ड के कर्मचारियों के लिए बनाए गए हमारे प्रशिक्षण मॉडल में डिजिटल साक्षरता एक प्रमुख हिस्सा होता है। लेकिन हमारे पास फील्ड कार्यकर्ताओं के लिए विभिन्न मॉडल हैं जो उनकी भूमिकाओं और पहले से मौजूद कौशल पर आधारित होते हैं।   

हकदर्शक की भूमिका में काम करने आने वाली ज़्यादातर महिलाएं पहली बार स्मार्टफोन इस्तेमाल करती हैं, इसलिए हम उन्हें सिर्फ सरकारी योजनाओं पर ही प्रशिक्षण नहीं देते हैं। हम उन्हें स्मार्टफोन के इस्तेमाल के लिए बुनियादी पहलुओं पर भी प्रशिक्षित करते हैं। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि विशेष रूप से ज़्यादातर ग्रामीण समुदाय स्मार्टफोन का इस्तेमाल यूट्यूब पर वीडियो देखने या व्हाट्सऐप या फेसबुक के लिए करता है। उदाहरण के लिए, जब हम स्थानीय औरतों को हकदर्शक बनने का प्रशिक्षण दे रहे थे तब हमनें यह पाया कि उनमें से ज़्यादातर औरतों को वर्णमाला की (लेटर की) को संख्या की (नंबर की) में बदलना नहीं आता था। या वे यह भी नहीं जानती थीं कि उनके फोन की मेमरी को कैसे साफ किया जाता है। वे पासवर्ड के लिए बड़े अक्षर और छोटे अक्षर की अदला-बदली नहीं कर पाती थीं। हम ऐसा मान लेते हैं कि अगर कोई आदमी स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे इसकी बुनियादी जानकारी होगी लेकिन अपने अनुभवों से हमनें यह जाना कि ऐसा बिलकुल नहीं है। 

महिलाओं द्वारा स्मार्टफोन के उपयोग के उद्देश्यों को देखते हुए उनके ज्ञान की कमी को समझा जा सकता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस अंतर को समझने में समय लगाया जाये और परिष्कृत प्रशिक्षण प्रक्रिया में जाने से पहले उस अंतर पर काम किया जाए।

दिये जा रहे समर्थन के साथ प्रशिक्षण में सिद्धान्त और व्यावहारिक दोनों तरह के अनुप्रयोगों को शामिल करने की आवश्यकता है 

हकदर्शक्स को ऐप के इस्तेमाल के तरीकों और विशिष्टाओं के बारे में बताने के बाद हम यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें असाईंमेंट दिये जाएँ ताकि वे विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में जानें और ऐप द्वारा प्रदान किए जाने वाले टूल का उपयोग करने का अभ्यास करें। उदाहरण के लिए, हम उन्हें लोगों की नकली प्रोफ़ाइल बनाने के लिए कहते हैं और ऐप के डैशबोर्ड पर उनके आवेदन की स्थिति पर नजर रखने का अभ्यास करवाते हैं।  

हमारा प्रशिक्षण पूरी तरह से डिजिटल नहीं हो सकता है।

इस तरह के शुरुआती प्रशिक्षण काम शुरू करने के लिए मददगार होते हैं। लेकिन जब वे क्षेत्र में जाकर काम करेंगे तब ही वे इस ऐप का व्यावहारिक उपयोग सीख पाएंगे और हमसे सवाल करेंगे। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए हम लोग एक महीने बाद रिफ्रेशर प्रशिक्षण का आयोजन करते हैं; और प्रत्येक 30–40 हकदर्शक्स के लिए जिला स्तर पर एक समन्वयक नियुक्त करते हैं। इन समन्वयकों का काम हकदर्शक्स से मिलकर ऐप के संचालन से जुड़े उनके सवालों का जवाब देना होता है। साथ ही वे सरकारी योजनाओं से जुड़े उनके सवालों का जवाब भी देते हैं। हमनें एक हेल्पलाइन भी बनाया है जिस पर हकदर्शक्स फोन कर सकते हैं, इसके अलावा तुरंत अपने सवालों का जवाब पाने के लिए एक सक्रिय व्हाट्सऐप ग्रुप भी है। रिफ्रेशर प्रशिक्षणों और चल रहे समर्थन का यह संयोजन तकनीकी उत्पादों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम हर 15 दिन में अपने ऐप को नई विशिष्टाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़ी नई जानकारियों के साथ अपडेट करते हैं। जहां एक तरफ हम हकदर्शक्स के लिए पुश नोटिफिकेशन का इस्तेमाल करते हैं वहीं इन विशेषताओं की व्याख्या के लिए पूरी तरह इनपर निर्भर नहीं रह सकते हैं। कहने का मतलब यह है कि हमारा प्रशिक्षण पूरी तरह से डिजिटल नहीं हो सकता है। हमारे समन्वयक और हेल्पलाइन हमारे हकदर्शक्स को जरूरी सहायता देते हैं।

तकनीकी प्रशिक्षण का संबंध सॉफ्ट स्किल से भी उतना ही है जितना कि तकनीक से

फील्ड में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए स्मार्टफोन या तकनीक से परिचित न होना कोई असामान्य बात नहीं है। कईयों के पास सरकारी अधिकारियों से लेकर स्थानीय सामुदायिक नेताओं जैसे हितधारकों के साथ काम करने का पूर्व अनुभव नहीं होता है। इस कारण से व्यक्तिगत आत्मविश्वास और सामाजिक और स्थानीय गतिशीलता के बारे में सोचना महत्वपूर्ण है।

हमनें यह महसूस किया कि हमारी तकनीकी प्रशिक्षणों में परिवार के सदस्यों को शामिल करने की भी जरूरत है।

जब हमलोगों ने महिलाओं को प्रशिक्षित करना शुरू किया तब पाया कि वे अपनी सेवाओं के बदले पैसा लेने में झिझकती है, खास कर पुरुषों से। वे लेनदेन के कथित सामाजिक निहितार्थ के बारे में चिंतित थीं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनके पति या परिवार के सदस्य इस काम के परिणाम के रूप में किसी भी तरह का बाहरी जुड़ाव नहीं चाहते थे। तब हमें इस बात का एहसास हुआ कि हमारी तकनीकी प्रशिक्षणों में इनके परिवार के सदस्यों को भी शामिल करने की जरूरत है। इसलिए हमनें अपने सत्रों में इन महिलाओं के पतियों आर भाइयों को भी बुलाना शुरू कर दिया। इसका बाद में एक दूसरा फायदा तब हुआ जब महिलाएं आसपास जाने के लिए परिवार के पुरुष सदस्यों के स्कूटर पर निर्भर रहने लगीं ताकि वे अपना काम कर सकें।

उन लोगों के लिए सह-पाठ्यक्रम बनाना जिन्हें प्रशिक्षण से लाभान्वित होने की उम्मीद है

कौशल विकास के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम और दी जा रही सहायता मददगार तो हैं लेकिन पर्याप्त नहीं हैं। कौशल को विकसित करने के लिए किए गए किसी भी प्रकार के प्रयास को आवश्यक रूप से फील्ड में काम करने वाले लोगों की बदलती जरूरतों के अनुसार परिवर्तित होते रहना चाहिए। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि इनमें उनकी प्रतिक्रियाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि मॉडल की बेहतर संरचना तैयार की जा सके और यह उनकी विशेष समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सके।

हमने पाया कि प्रतिक्रियाओं को शामिल करने से यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है कि कार्यक्रम में उनकी भागीदारी है जिनकी सेवा के लिए यह बनाया गया है।

हम लोगों ने इसे अपने अँग्रेजी भाषा के कार्यक्रम में देखा जिसका आयोजन हमनें अपने फील्ड के कर्मचारियों के लिए किया था। हमारे पूर्णकालिक कर्मचारियों ने हमसे यह अनुरोध किया कि हमें ईमेल-संवाद के तौर-तरीकों और ग्राहकों से पेशेवर तरीके से संवाद जैसे विषयों पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। इन कर्मचारियों में हमारे दोस्त और फील्ड समन्वयक भी शामिल थे। इस प्रतिक्रिया ने हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम को मजबूत बनाने और हमारे कर्मचारियों को अच्छा काम करने के लिए आवश्यक कौशल के निर्माण में हमारी मदद की। इसके अलावा, हमने यह पाया कि प्रतिक्रियाओं को शामिल करने से यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है कि कार्यक्रम में उनकी भागीदारी है जिनकी सेवा के लिए यह बनाया गया है।

प्रशिक्षण का विकेंद्रीकृत मॉडल अधिक सफल होता है

हम जानते हैं कि सामाजिक क्षेत्र में स्थानीय संदर्भ व्यापक रूप से भिन्न होते हैं और कार्यक्रम की सफलता के लिए आवश्यक है वह इन विविधताओं को ध्यान में रखे। जब देश भर में काम करने वाले फील्ड कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की बात आती है तब हमनें पाया कि इस स्थिति में विकेन्द्रीकरण (डिसेन्ट्रलाइजेशन) वाला मॉडल सबसे अच्छा काम करता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि हमारे प्रशिक्षण क्षेत्र में व्याप्त सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक, आर्थिक और राजनीतिक विभिन्नताओं के कारकों को ध्यान में रखते हैं। 

उदाहरण के लिए, उत्तर भारत के राज्यों में हमें दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में परिवार के पुरुष सदस्यों को शामिल करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगाना पड़ता है। असम और नागालैंड के उत्तरपूर्वी राज्यों में हमें स्मार्टफोन की विशेषताओं के बारे में सिखाने में कम समय लगता है। वहीं बुन्देलखण्ड जैसे इलाकों में हमें अधिक समय लगाना पड़ता है जहां औरतों को अधिक मदद की जरूरत होती है। 

हमारे प्रशिक्षण हमेशा ही विकेन्द्रीकरण को प्राथमिकता देते हैं चूंकि हमने काम करने की प्रक्रिया के दौरान इसे सीखा है और इसका स्तर अच्छा किया है इसलिए हम आगे भी विकेन्द्रीकरण के लिए सक्षम हैं। दूसरे शब्दों में, छोटी इकाई के रूप में भी विकेन्द्रीकरण मॉडल का अनुकरण करना संभव है। 

हमारी चुनौती हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बेहतर तकनीक का लाभ उठाने और इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता को कम करने की है। हम ऐप पर नई योजनाओं और नई सुविधाओं के बारे में लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए ऑडियो और पॉडकास्ट के उपयोग के तरीके ढूंढ रहे हैं। हालाँकि, इसके लिए पूरी तरह से अलग कौशल की आवश्यकता होती है; शायद यह हमारी टीम के लोगों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का अगला चरण होगा। 

सामाजिक बेहतरी के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर ज्ञान का आधार बनाने का प्रयास करने वाले 8 भागों वाली शृंखला का यह दूसरा लेख है।  

इस लेख को अँग्रेजी में पढ़ें

अधिक जानें

  • भारत में विकास क्षेत्र पर हकदर्शक द्वारा की गई शुरुआतों और उसके प्रभाव के बारे में पढ़ें
  • पढ़ें कि कैसे फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को उनके काम में बेहतर सहायता दी जा सकती है।

लेखक के बारे में
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अनिकेत डोएगर

अनिकेत डोएगर हकदर्शक के सीईओ और सह-संस्थापक हैं। उन्हें विकास क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह टीच फॉर इंडिया के फेलो थे, और ज्ञान प्रकाश फाउंडेशन और इंडस एक्शन के साथ काम कर चुके हैं। वह एक्यूमेन इंडिया फेलो 2018 भी थे। अनिकेत एसआरसीसी, दिल्ली के पूर्व छात्र हैं।

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मधुरा कार्णिक

मधुरा कार्णिक हकदर्शक के ग्रोथ वर्टिकल का नेतृत्व करती हैं जिसमें सेल्स, मार्केटिंग, कम्युनिकेशन, क्लाइंट सर्विसिंग और प्रभाव माप शामिल हैं। वह एक पूर्व पत्रकार और वित्तीय विश्लेषक हैं, और पहले क्वार्ट्ज, मिंट और क्रिसिल के लिए काम कर चुकी हैं।

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