किशोर
युवाओं को समझने से पहले, हमें खुद को समझना होगा
हम अक्सर सवाल करते हैं कि युवाओं में क्या बदला जाए। लेकिन अगर समाज उन्हें अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की आज़ादी ही न दे, तो क्या इतना काफ़ी है?मेघालय में फुटबॉल से ज़िंदगी के मैदान पर उतरते युवा
शिलांग का यह फुटबॉल क्लब बच्चों को सिर्फ खेल नहीं, ज़िंदगी जीना भी सिखा रहा है। देखिए मेघालय से हमारी यह कहानी।