रोज़गार
जो लोग दूसरों की मुश्किलें सुनते हैं, उन्हें कौन सुनता है?
बस्तर जैसे संघर्ष प्रभावित इलाकों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रोज़ाना हिंसा, विस्थापन, असुरक्षा और समुदाय के दुखों से गुज़रते हैं। ये लोग समुदाय की मुश्किलें सुनते हैं, पर उनकी मानसिक सेहत और भावनात्मक बोझ को कौन समझता है?भारतीय महिलाओं की श्रमबल में हिस्सेदारी इतनी कम क्यों?
महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी आज भी चुनौती है। जानिए, आज के एपिसोड में।