प्यारे आंदोलन, ….. वह कभी किसान बनकर लौटता है, कभी छात्र, कभी जंगल, कभी पहाड़। उसका आना सड़क और संसद, दोनों के लिए ज़रूरी है। इसलिए आज एक खुला ख़त, आंदोलन के नाम। कुमार उन्नयन, इंद्रेश शर्मा 4 मिनट लंबा लेख