विकास सेक्टर में काम करते समय “इनक्लूजन” यानी समावेशन एक ऐसा शब्द है जो अक्सर सुनने को मिलता है। इसका मतलब है अलग-अलग पृष्ठभूमि और परिस्थितियों वाले लोगों को किसी व्यवस्था, सेवा या निर्णय प्रक्रिया में बराबरी से शामिल करना।
लेकिन इनक्लूजन का मतलब सिर्फ किसी को शामिल कर लेना नहीं है। यह भी जरूरी है कि उनकी बात सुनी जाए, उनकी जरूरतों को ध्यान में रखा जाए और उन्हें बराबरी से भाग लेने का मौका मिले।
इनक्लूजन को अक्सर डॉयर्वसिटी यानी विविधता के साथ जोड़ा जाता है। दोनों में फर्क यह है कि विविधता यह देखती है कि कौन मौजूद है, जबकि इनक्लूजन यह देखता है कि कौन सच में शामिल है।
विकास क्षेत्र में किसी कार्यक्रम, योजना या सेवा को “सभी के लिए” बताते समय यह देखना भी जरूरी है कि वास्तव में कौन इसका लाभ ले पा रहा है और कौन किसी वजह से बाहर रह गया है।
यानी इनक्लूजन सिर्फ दरवाजा खोलना नहीं, बल्कि अंदर सबके लिए जगह बनाना है।
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