सरकारी योजना
बदलते मौसम और सिकुड़ती ज़मीन के बीच मामित के झूम किसान
मिज़ोरम के मामित में झूम किसान अनिश्चित मौसम, चूहों के बढ़ते हमलों और बागान खेती के असफल प्रयोग के बीच एक बड़े संकट का सामना कर रहे हैं। अमर्त्य सेन के विचारों को साकार करते देश के पांच संगठन
स्वच्छता से आजीविका तक, पांच गैर-लाभकारी संगठन अमर्त्य सेन के विकास से जुड़े विचारों को दर्शाते हैं—स्वतंत्रता, आकांक्षा, मूलभूत सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी।हम आदिवासियों के स्वास्थ्य की जड़ें जंगल में हैं
कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का सवाल केवल दवाओं या अस्पतालों से नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, परंपराओं और गरिमा से भी जुड़ा हुआ है।क्या भारत की स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था सच में सभी की रक्षा करती है?
स्वास्थ्य बीमा का उद्देश्य बीमारी के समय आर्थिक बोझ को कम करना है। लेकिन बड़ी संख्या में विकलांग व्यक्तियों के लिए बीमा तक पहुंच अब भी चुनौतीपूर्ण है।गांव का युवा आज भी स्किल ट्रेनिंग से दूर क्यों है?
डीडीयू-जीकेवाई योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना था। लेकिन वर्तमान में यह जागरूकता की कमी, सामाजिक रुकावटों और पाठ्यक्रम की कमियों से जूझती नजर आती है।आंगनवाड़ी: शिक्षा की नींव या सिर्फ पोषण का केंद्र?
आंगनवाड़ी शुरुआती बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की आधारशिला है। लेकिन प्रशासनिक और पोषण संबंधी जिम्मेदारियों के दबाव में कार्यकर्ता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देखभाल पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं।सरल कोश: एंटाइटलमेंट
एंटाइटलमेंट का अर्थ सिर्फ एक शब्द की समझ तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि अधिकार कैसे पहचाने जाएं और उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया क्या है।क्या मनरेगा की खामियों को भर पाएगा वीबी-जी राम जी?
केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा एक अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है। ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?सरल कोश: फाइनेंस कमीशन या वित्त आयोग
वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो सरकार को यह सिफारिश करती है कि देश के वित्तीय संसाधनों का राज्यों और स्थानीय सरकारों के बीच किस तरह न्यायसंगत और बेहतर ढंग से वितरण किया जाए।क्या भारत के कपास किसानों को जैविक खेती का जोखिम उठाना चाहिए?
जैविक कपास की बढ़ती मांग के बावजूद किसानों को इसकी खेती में कई जोखिम उठाने पड़ते हैं। क्या अनुकूल नीतियां और सरकारी सहयोग इस तस्वीर को बदल सकते हैं?सतत एफपीओ का निर्माण: भारत की सहकारी समितियों से सीख
2025 की शुरुआत तक, केंद्र सरकार की योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की जा चुकी थी। लेकिन केवल लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी एफपीओ की संरचना को कमजोर कर सकती है।