November 14, 2023

फोन सर्वेक्षण करने के सबसे कारगर तरीके क्या हैं?

फ़ोन सर्वेक्षण करते हुए सर्वे करने वाली संस्था और उत्तरदाता के बीच विश्वसनीयता का संबंध बनाकर ही सार्थक और सटीक आंकड़ों तक पहुंचा जा सकता है।
6 मिनट लंबा लेख

कोविड-19 के बाद से विकास सेक्टर में आंकड़ों के संग्रहण (डेटा कलेक्शन) के लिए फोन सर्वेक्षण करने का चलन बढ़ गया है। स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिमों को कम करने के अलावा फ़ोन सर्वेक्षण के कई लाभ हैं, जिनमें कम लागत आना और विस्तार की अधिक संभावनाएं होना भी शामिल है। हालांकि फोन सर्वेक्षण करते हुए आने वाली की मुख्य चुनौती उच्च-गुणवत्ता वाले सार्थक आंकड़ों को संग्रहित करना और उत्तरदाताओं की गरिमा और विश्वास को बनाये रखना है।

फोन सर्वेक्षण तकनीकों की बेस्ट प्रैक्टिस के अनुसार उत्तरदाताओं के साथ मजबूत संबंध स्थापित करना और इस विश्वास-निर्माण प्रक्रिया में उत्तरदाताओं के नाम का उपयोग करने से मदद मिलती है। इसलिए हाल में जब हम एक ऐसी स्थिति में फंस गये थे जिसमें हमारे पास उन लोगों के नाम उपलब्ध नहीं थे जिन्हें हम फोन कर रहे थे, हमें इस बात की चिंता थी कि इससे उच्च-गुणवत्ता वाले आंकड़े प्राप्त करने और उत्तरदाताओं के साथ सकारात्मक संबंध बनाये रखने की हमारी योग्यता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, हमने पाया कि विस्तृत, व्यक्तिगत फोन सर्वेक्षणों के लिए उत्तरदाताओं के नाम नहीं होने से किसी तरह की बाधा उत्पन्न नहीं होती है। बेशक, सर्वेक्षण की ऐसी कई तकनीकें हैं जिनमें उत्तरदाताओं के नाम की जरूरत नहीं पड़ती है। उदाहरण के लिए, रैंडम डिजिट डायलिंग (जिसमें लोगों या परिवारों को बिना किसी चयन प्रक्रिया के कॉल कर लिया जाता है) और कई बड़े-पैमाने के सर्वेक्षण तकनीकों में उत्तरदाताओं के नाम सहित अन्य विवरण शामिल नहीं होते हैं। इस सर्वेक्षण के लिए हम विस्तृत सर्वेक्षण (लॉन्ग-फॉर्म सर्वे) कर रहे थे जिसमें ऊर्जा की खपत और घरेलू विशेषताओं से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारियां मांगी गई थी।

हमारे सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष हमने बिहार एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में घरों एवं व्यापारिक संस्थाओं के साथ 1,700 से अधिक फोन-सर्वेक्षण पूरे किए। हमारे सभी उत्तरदाता ऐसे लोग थे जिन्हें विभिन्न ऊर्जा सेवा कंपनियों (ईएससीओ) से वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) प्राप्त हुई थी और हम उनकी ऊर्जा के उपयोग, ऊर्जा प्राथमिकताओं और घरेलू निर्णयों के बारे में विस्तार से जानना चाहते थे। इस सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े का उपयोग लंबी-अवधि वाली निगरानी प्रणाली (मॉनिटरिंग सिस्टम) का आधार बनाने के लिए किया गया था।

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी

सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए, विभिन्न ईएसससीओ कंपनियों ने हमारे साथ उनके ग्राहकों कि सूची साझा की थी, जिनमें ग्राहकों के प्रकार और उनके फोन नंबर थे लेकिन उनके नाम नहीं थे। कुछ उचित कारणों से ही ये निजी कंपनियां अपने ग्राहकों की गोपनीयता सुनिश्चित करना चाहती थीं। इसलिए हमने एक ऐसा सर्वेक्षण दृष्टिकोण बनाया जिसका लक्ष्य ग्राहकों के नाम ना होने के बावजूद उनके साथ एक संबंध स्थापित करना था। 

इस प्रक्रिया में हमारी दो परिकल्पनाएं थीं:

  1. सही उत्तरदाताओं की पहचान करना अपेक्षाकृत अधिक कठिन होगा; और
  2. सर्वे करने वालों (प्रगणकों) और उत्तरदाताओं के बीच विश्वास और तालमेल की कमी के कारण सर्वेक्षण से इनकार की दर में वृद्धि होगी।

इन परिकल्पनाओं की जांच करने और भविष्य में होने वाले सर्वेक्षण का सबसे कारगर तरीका विकसित करने के लिए हमने प्रगणकों और उत्तरदाताओं दोनों से आंकड़े प्राप्त किए।1

परिकल्पना 1: सही उत्तरदाताओं की पहचान करना अपेक्षाकृत अधिक कठिन होगा

उत्तरदाताओं के नाम के बिना उनके साथ सर्वेक्षण करने की सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की होती है कि हम सही व्यक्ति से संपर्क कर पा रहे हैं या नहीं। इस बात की पूरी संभावना थी कि ईएसससीओ से हमें जो फोन नंबर मिले थे वे या तो बदल गये हों, या फिर फोन पर बात करने वाला व्यक्ति हमारा उत्तरदाता ना हो।

इस चुनौती से निपटने के प्रयास के रूप में हमने चार-चरणों वाली एक त्रिकोणीय प्रक्रिया (सर्वेक्षण के सन्दर्भ में, ट्रायंगुलेशन प्रोसेस किसी बिन्दु की स्थिति ज्ञात करने की वह विधि है जिसमें एक आधार-रेखा के दोनों सिरों से उस बिन्दु की दिशा में बनने वाले दो कोणों से जानकारी का सत्यापन किया जाता है) विकसित की जिसका उपयोग प्रत्येक सर्वेक्षण में किया गया।

फोन सर्वे में उत्तरदाताओं की पहचान करना - फोन सर्वेक्षण
स्रोत: मिरो

सर्वेक्षण के परिणाम

  • लगभग 11 फीसद उत्तरदाता हमारे डेटाबेस में मौजूद बिजली कंपनी (ईएससीओ) से मेल नहीं खाते थे। गहन जांच में, जिसमें गणनाकारों से बात करना, ऑडियो की समीक्षा करना और कुछ उत्तरदाताओं को वापस बुलाना शामिल था, हमने पाया कि इनमें से कई उत्तरदाताओं को बस अपने ईएससीओ के नाम नहीं पता थे, लेकिन उन्हें पता था कि उनके पास ‘सौर कनेक्शन’ है। इसके कारण हमें उत्तरदाताओं से यह पूछना पड़ा कि क्या उनके पास ‘ग़ैर-सरकारी’ प्रदाताओं से प्राप्त ‘सौर कनेक्शन’ है।
  • लगभग 98 फीसद का पता हमारे डेटाबेस में दर्ज पतों से मेल खा रहा था।
  • हमने इन उत्तरदाताओं की प्रतिक्रियाओं की तुलना उन लोगों से की जिन्होंने बिजली बिल राशि और कनेक्शन के वर्ष जैसे बुनियादी प्रश्नों पर आसानी से अपने ईएससीओ के नाम बता दिये। उदाहरण के लिए, औसत बिल की राशि में मात्र ~100 रुपये का अंतर था।
  • अपने ईएसससीओ की पहचान ना कर पाने वाले लगभग 20% उत्तरदाता अपना नाम नहीं बताना चाहते थे। इसके विपरीत, अपने ईएसससीओ की पहचान करने वाले उत्तरदाताओं में केवल 2% लोगों को ही अपना नाम बताने में हिचक थी।

सबक एवं सुझाव

  • आपके पास उपलब्ध सभी आंकड़ों का लाभ उठाकर ट्राइएंगुलेशन करें और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि आप सही उत्तरदाता से बात कर रहे हैं।
  • उत्तरदाताओं की विशेषताओं की पहचान के लिए परोक्ष तरीक़ों का उपयोग करें। हालांकि इस बात की पूरी संभावना है कि इन तरीक़ों से उत्तरदाताओं की पहचान सुनिश्चित ना हो पाए लेकिन इससे आपका आत्म-विश्वास जरुर बढ़ेगा।
  • हमने नाम साझा करने से इंकार करने वाले और उनकी ऊर्जा कंपनी का नाम बताने में असमर्थता के बीच उच्च स्तर का सहसंबंध पाया। इससे यह पता चल सकता है कि गलत उत्तरदाता से संपर्क करने की स्थिति में उन्हें अपना नाम या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में अधिक झिझक होगी। 

परिकल्पना 2: प्रगणकों और उत्तरदाताओं के बीच विश्वास और तालमेल की कमी के कारण सर्वेक्षण से इनकार की दर में वृद्धि होगी

उत्तरदाताओं के नाम के बिना सर्वेक्षण करने का एक और संभावित मुद्दा उनका विश्वास हासिल करना है। उत्तरदाताओं को यह बात अजीब लग सकती है कि एक व्यक्ति उन्हें फोन करके उनसे व्यक्तिगत जानकारियां मांग रहा है लेकिन जिस व्यक्ति से वह बात करना चाहता है, उसका नाम तक नहीं जानता है।

लेकिन हमें यह देख कर आश्चर्य हुआ कि यह समस्या हमारी उम्मीद से कम थी! हमें सहमति मिलने के बाद 95% से अधिक उत्तरदाताओं ने स्वेच्छा से हमारे कॉल की शुरुआत में ही अपना नाम बता दिया।

उत्तरदाताओं का सर्वेक्षण में शामिल होने से इनकार करना - फोन सर्वेक्षण
स्रोत: आईडीइनसाइट 

हमने यह भी पाया कि नाम लेने में हिचक दिखाने वाले 45 उत्तरदाताओं में से, 12 (या 26 फीसद) उत्तरदाताओं ने या तो कुछ प्रश्नों के बाद सर्वेक्षण को जारी रखने से मना कर दिया या फिर बिना किसी तरह का कारण दिये कॉल काट दिया। दूसरी तरफ, अपना नाम आसानी से साझा करने वाले 1058 उत्तरदाताओं में से, 154 (या 14.5 फीसद) ने कुछ सवालों के बाद सर्वेक्षण को जारी रखने से इंकार कर दिया।

सबक एवं सुझाव

  • कॉल की शुरुआत में स्पष्ट, संक्षिप्त लेकिन पूर्ण सहमति वाली भाषा शामिल करना महत्वपूर्ण है। हम समय के निवेश की सलाह देते हैं ताकि सहमति भाषा का अनुवाद उच्च-गुणवत्ता वाला हो सके। 
  • इस बात का स्पष्ट विवरण दें कि आपके पास उनके नाम क्यों नहीं हैं और आप उनसे उनका नाम क्यों पूछ रहे हैं।
  • विश्वस्त भागीदारों से सहायता हासिल करें। हमने पाया है कि जब कोई विश्वस्त प्राधिकारी उत्तरदाताओं को इस बात की जानकारी देता है कि उनसे संपर्क किया जाएगा और यह बताता है कि यह क्यों महत्वपूर्ण है, तो उस स्थिति में वे सर्वेक्षण में भाग लेने में रुचि दिखाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि संगठन के फील्ड टीम को किए जा रहे सर्वेक्षण की जानकारी हो और वे ग्राहकों के प्रश्नों का का उत्तर देकर सहायता कर सकती है।2
  • कॉल के अंत में इस बात की पुष्टि करें कि व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारियां (जिनमें नाम भी शामिल हैं) बाहरी रूप से किसी के साथ साझा नहीं की जाएगी, और सर्वेक्षण पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया का अवसर भी प्रदान करें।

हमारे अनुभव ने विस्तृत फ़ोन सर्वेक्षण करने के लिए पीआईआई की आवश्यकता पर एक नजरिया प्रदान किया है। कुल मिलाकर, बिना नाम वाले उत्तरदाताओं के साथ सर्वेक्षण करते समय कुछ खास तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इनमें इच्छित उत्तरदाता की गलत पहचान का जोखिम, उत्तरदाताओं के साथ विश्वास स्थापित करने में कठिनाई और उत्तरदाताओं द्वारा सर्वेक्षण पूरा करने से इनकार करना शामिल है। हालांकि, अन्य उपलब्ध जानकारियों का उपयोग करके, ज्ञात एवं अज्ञात उत्तरदाताओं से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं की तुलना करके, फ़ील्ड पदाधिकारियों की मदद से उत्तरदाताओं तक सर्वे की पूर्व जानकारी पहुंचाकर और सहमति के लिए एक मज़बूत स्क्रिप्ट तैयार करके इन चुनौतियों को एक हद तक कम करने का प्रयास किया जा सकता है।

फुटनोट्स:

  1. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हम इस बारे में कोई कारण संबंधी बयान देने में असमर्थ हैं कि हमारी प्रक्रियाओं के कारण कुछ निश्चित परिणाम कैसे प्राप्त हुए होंगे। हमारे पास कोई प्रतितथ्यात्मक स्थिति नहीं है, इसलिए हमारे अनुभव की प्रकृति वर्णनात्मक और गुणात्मक है।
  2. हालांकि, साझेदार संगठन की फील्ड टीम को प्रश्नावली से जुड़ी ऐसी कोई भी जानकारी नहीं होनी चाहिए, जिसका उपयोग वे उत्तरदाताओं के उत्तरों को पूर्वाग्रहित करने के लिए कर सकते हैं। हमारे मामले में, उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि हमने इस सर्वेक्षण में किन विषयों को शामिल करने की योजना बनाई है।

यह लेख मूलरूप से आईडीइनसाइट पर प्रकाशित हुआ था

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ें

लेखक के बारे में
भव्या खरे-Image
भव्या खरे

भव्या खरे आईडीइनसाइट के साथ बतौर एसोसिएट काम करती हैं।

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