क्या सिर्फ़ हमें ही ऐसा लग रहा है, या हर मिलेनियल अगले पांच साल में रिटायर होने की सोच रहा है?
1
“मैं कुछ महीनों का ब्रेक लेने वाला हूं।”
“ब्रेक में क्या करोगे?”
“कुछ नहीं।”
मतलब…कुछ भी नहीं?
“मैं फिर से समझना चाहता हूं कि आराम किसे कहते हैं।”
— नौकरी छोड़कर कंसल्टिंग शुरू करने से ठीक तीन हफ़्ते पहले की बातचीत।
2
“मुझे बढ़ईगीरी या बुनाई जैसा कोई हुनर सीखना है। ऐसा काम, जिसमें स्क्रीन न घूरनी पड़े। अभी 12 घंटे की एक डॉक्यूमेंट्री देखी। उसमें बता रहे थे कि एआई से बचने का अब यही एक रास्ता है।”
— जन्मदिन की एक पार्टी में सुनी गई बातचीत।
3
“मैं ऑर्गेनिक खेती का कोर्स करने जा रहा हूं। महीने भर की वीकेंड क्लासेज़ के 50,000 रुपये लगेंगे। अगर ठीकठाक सीख गया, तो कुछ सालों में नौकरी छोड़ दूंगा।”
“लेकिन कैसे?”
“ज़मीन पर खेती-बाड़ी करूंगा।”
“लेकिन तुम्हारे पास तो ज़मीन ही नहीं है।”
“यहां से दूर चला जाऊं, तो मिल ही जाएगी।”
— एक चाय की दुकान पर सुनी गई बातचीत।

4
“अगर मैं साल के अंत में इस्तीफा दूं , तो कंसल्टेंट बनकर गुज़ारा हो जाएगा?”
“किस चीज़ पर कंसल्टिंग करोगे?”
“शायद काम से होने वाली थकान और बर्नआउट पर!”
— किसी ऐसे शख़्स की बातचीत, जिसने बस एक आख़िरी ईमेल भेजने के लिए लैपटॉप खोला था।
5
“मैं एक फ़ेलोशिप करने के बारे में सोच रहा हूं।”
“अचानक?”
“दूसरी मास्टर्स डिग्री महंगी पड़ेगी। और फ़ेलोशिप में पैसे भी मिलते हैं।”
“यानी काम से ब्रेक भी मिल जाएगा और परिवार के साथ भी नहीं रहना पड़ेगा!”
“बिल्कुल!”
— शादी के खाने पर सुनी गई बातचीत।
6
“मैं कुछ समय की छुट्टी लेकर ख़ुद पर काम करने वाला हूं।”
“मतलब?”
“घर वालों के साथ घूमना-फिरना.. कसरत..अपनी पसंद का खाना बनाना सीखना.. पता नहीं। कई साल हो गए, किसी शौक़ के लिए वक्त ही नहीं मिला। पूरा टाइम तो टीवी देखते हुए फ़ोन स्क्रॉल करने में चला जाता है!
— 12 घंटे काम करने के बाद, रात 9:30 बजे सुनी गई बातचीत।
7
“मुझे लगता है कि अब मुझे करियर के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।”
“बहुत बढ़िया!”
“मुझे ज़िंदगी जीनी चाहिए।”
“कितनी ख़ूबसूरत बात है!”
“वही तो। मैं इस पर एक लेख लिखने के बारे में सोच रहा हूं।”
— फेसबुक पर सुनी गई बातचीत।
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