फिल्म दामिनी में सनी देओल का "तारीख पे तारीख" वाले सीन की एक तस्वीर_चुनाव

तारीख पर तारीख!
गांव और शहर के चुनाव में उतना ही फर्क है, जितना घर की दीवार और फेसबुक वॉल में।
एक शहरी गली जिसमें दोनों ओर छोटे घर और दुकानें है और कुछ लोग बीच में चर्चा करते हुए_पानी का अधिकार

जन आंदोलन लंबे समय तक कैसे जिंदा रहते हैं?
आंदोलन की असली ताकत सामुदायिक भागीदारी, जमीनी नेतृत्व और व्यापक गठबंधन होते हैं। छोटी-छोटी जीतों, अदालती आदेशों और नीतिगत बदलावों के बावजूद संघर्ष लगातार जारी रहता है।
पहाड़ों के बीच हरे धान के खेत_चावल की खेती

कश्मीर घाटी से क्यों गुम हो रहे हैं पारंपरिक धान के खेत और उनकी खुशबू?
परंपरागत रूप से चावल की खेती करने वाले किसान, सेब की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खेती की जमीनों पर बनते रिहाइशी और गैर-रिहाइशी इलाके भी धान के रकबे को घटा रहे हैं।
वाहिद भट | 8 मिनट लंबा लेख
चेन्नई के अंबत्तूर एरी में मछली पकड़ता एक व्यक्ति_पोरंबोके

पोरंबोके: शहरी सामुदायिक संसाधनों की पुनर्कल्पना 
अगर पानी साफ तौर पर दिखाई दे, सबके लिए आसानी से उपलब्ध हो, और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए, तो हमारे शहर कैसे दिखेंगे?
नुपुर खांतर | 13 मिनट लंबा लेख

ज़मीनी कहानियां


मेरा एक दिन


घर में सीढ़ियों के पास एक व्यक्ति_इंडियन साइन लैंग्वेज
बराबरी की राह देखता बधिर समुदाय
यह​​​​ अधिकारों के लिए सक्रिय युवा कार्यकर्ता परमीत के जीवन, उनके काम और उनसे जुड़ी चुनौतियों की झलक प्रस्तुत करता है।
रिकॉर्डिंग स्टूडियो में माइक पर कागज से पढ़कर बोलती एक प्रौढ़ महिला_सामुदायिक रेडियो
स्टूडियो और गांव के बीच: एक सामुदायिक आरजे का दिन
इस वीडियो में दिखेगा कि कैसे एक सामुदायिक आरजे स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिंग और गांव के बीच अपने दिन को बांटती हैं। यह कहानी सामुदायिक रेडियो कार्यकर्ता के काम को समझने की कोशिश है।
जंगल में लगी आग को बुझाती_महिला वन रक्षक
संवाद से संरक्षण तक: एक महिला वन रक्षक का सहभागी अनुभव
उदयपुर, राजस्थान की एक महिला फॉरेस्ट गार्ड वन संरक्षण और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही हैं, उनके संघर्ष और अनुभवों के बारे में यहां पढ़िए।