सामाजिक न्याय

November 27, 2025
सरल कोश: इंटरसेक्शनैलिटी
इंटरसेक्शनैलिटी यानी किसी व्यक्ति की पहचान एक नहीं, कई पहलुओं से मिलकर बनती है। विकास सेक्टर में इंटरसेक्शनैलिटी जरूरी है, क्योंकि यह नीतियों और कार्यक्रमों को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाती है।
November 25, 2025
आईडीआर इंटरव्यूज | राजिम केतवास
पिछले चार दशकों से श्रमिक एवं महिला अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रही राजिम केतवास मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन में भागीदारी से लेकर अपने संगठन दलित आदिवासी मंच की स्थापना तक की यात्रा और अनुभवों को साझा कर रही हैं।
October 22, 2025
संघर्ष से परे: कश्मीर के दर्द और जीवटता की कहानी
कश्मीर में दशकों से अशांति और हिंसा ने एक गहरी मानसिक वेदना को जन्म दिया है। कश्मीरी आवाम इससे कैसे जूझती है और इस दिशा में कौन से कदम उठाये जाने चाहिए?
सैयद मुजतबा | 12 मिनट लंबा लेख
October 8, 2025
गिग कामगारों को बुनियादी अधिकार देने वाले कानूनों की राह इतनी कठिन क्यों है
लंबे समय तक एडवोकेसी और संघर्ष के बाद बने कानूनों से कई राज्यों में गिग और प्लेटफार्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन तो मिला है लेकिन इतना भर होना काफी नहीं है।
शेख सलाउद्दीन | 10 मिनट लंबा लेख
October 7, 2025
पोषण और स्वास्थ्य की सरकारी नीतियों से बहुत दूर है जमीनी हकीकत 
पोषण से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसा दृष्टिकोण चाहिए जो समुदाय की पोषण संबंधी जरूरतों और स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति तंत्र की दक्षता के बीच संतुलन कायम कर सके।
रंजन कांति पांडा | 8 मिनट लंबा लेख
September 24, 2025
जुगनू: रेड लाइट एरिया में पली पीढ़ी की निराली मैगजीन
मुजफ्फरपुर, बिहार में चार पन्नों से शुरू हुआ 'जुगनू' अखबार आज 36 पेज की एक मैगजीन बन गया है और अब यहां के युवाओं को एक नई पहचान दे रहा है।
शेड्स ऑफ रूरल इंडिया | 2 मिनट लंबा लेख
September 23, 2025
बराबरी की राह देखता बधिर समुदाय
यह​​​​ अधिकारों के लिए सक्रिय युवा कार्यकर्ता परमीत के जीवन, उनके काम और उनसे जुड़ी चुनौतियों की झलक प्रस्तुत करता है।
परमीत सिंह | 2 मिनट लंबा लेख
September 18, 2025
सरल कोशः पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली)
सरल-कोश के जरिए विकास सेक्टर से जुड़े नागरिक संगठनों के लिए कठिन अंग्रेजी शब्दों की सरल व्याख्या - पीडीएस।
September 17, 2025
ई-केवायसी: भोजन के अधिकार की राह में खड़ी नई दीवार
राशन कार्ड के लिए ई-केवायसी प्रक्रिया में अस्पष्टता और इसकी असफलता, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लोगों की भोजन तक पहुंच को खतरे में डाल रही है।
समीत पांडा, श्वेता दास | 14 मिनट लंबा लेख
August 5, 2025
भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली​​ में​​ वंचित ​​समुदायों की उपेक्षा
​बिहार में कारावास की हकीकत आज भी जातीय भेदभाव और ढांचागत पक्षपात से प्रभावित है, जिसे समावेशी और न्यायपूर्ण बनाने के लिए बुनियादी बदलाव की जरूरत है।​
प्रवीण कुमार | 10 मिनट लंबा लेख
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