गोवंडी में आया बदलाव सामुदायिक ताक़त का उदाहरण है

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एक डंपिंग ग्राउंड और धुएं छोड़ती चिमनी_नागरिक समुदाय
गोवंडी एम-ईस्ट वार्ड का हिस्सा है, जो मुंबई के सबसे बड़े डंपिंग ग्राउंड और इसके एकमात्र बायोमेडिकल अपशिष्ट भट्टी के लिए कुख्यात है। | चित्र साभार: शेख फ़ैयाज़ आलम

सितंबर 2023 में, हमारे नागरिक-नेतृत्व वाले संगठन – गोवंडी न्यू संगम वेलफेयर सोसाइटी – को पहली बड़ी जीत उस समय मिली जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने गोवंडी के शिवाजी नगर से बायोमेडिकल अपशिष्ट भट्टी को हटाने का आदेश दिया। हमने अक्टूबर 2022 में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी, और हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्लांट को दो साल के भीतर एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए।

गोवंडी एम-ईस्ट वार्ड का हिस्सा है, जो मुंबई के सबसे बड़े डंपिंग ग्राउंड और इसके एकमात्र बायोमेडिकल अपशिष्ट भट्टी के लिए कुख्यात है। इन कारकों की वजह से यह क्षेत्र तेज़ी से टीबी (तपेदिक), ब्रोंकाइटिस और ऐसी ही अन्य बीमारियों  की चपेट में आ रहा है।

मेरा जन्म और पालन-पोषण गोवंडी में ही हुआ है और मैं, हमारे आसपास के इलाकों के प्रति नगरपालिका की उदासीनता के नतीजों का साक्षी रहा हूं। यहां, नागरिक मुद्दों पर कई समाजसेवी संस्थाएं काम कर रही हैं, लेकिन हमें मालूम है कि इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है और यहां परिस्थितियों में कोई बहुत अधिक बदलाव नहीं आया है। स्वच्छता की कमी, कुछ खुली जगहें और शिक्षा की खराब सुविधाएं ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें प्रशासन के सामने लाये जाने की जरूरत है, और इसके लिए समुदायों के प्रतिनिधियों से बेहतर दूसरा कौन हो सकता है?

शुरुआत में मैंने अकेले ही काम किया। मैं सोशल मीडिया पर सड़कों के गड्ढों और स्वच्छता की बदतर स्थिति के बारे में लिखता था। स्थानीय लोगों ने मेरे प्रयासों पर ध्यान दिया और मेरे इस काम की सराहना भी की। इसके बाद, धीरे-धीरे वे मेरे साथ इस अभियान में जुड़ने लगे। 2021 में, हमने अपने संगठन का पंजीकरण करवाया क्योंकि हमारा मानना था कि यह समुदाय के प्रतिनिधियों के रूप में हमारे काम को आधिकारिक बना देगा। हमने अपनी जनहित याचिका का समर्थन करने के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक-आर्थिक डेटा इकट्ठा करते हुए, बायोमेडिकल कचरा भट्टी के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान शुरू किया। इनमें टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज की 2015 की रिपोर्ट भी शामिल थी, जिसमें पता चला था कि एम-ईस्ट वार्ड का मानव विकास सूचकांक शहर में सबसे कम था।

हमने सूचना के अधिकार का उपयोग करके एक आवेदन दिया ताकि हम सांस से संबंधित रोगों से जुड़े सरकारी स्वास्थ्य आंकड़े प्राप्त कर सकें। इस आवेदन के बाद प्राप्त आंकड़ों से हमें पता चला कि इस वार्ड में हर साल लगभग 5,000 लोग टीबी से पीड़ित हो जाते हैं। 

अदालत का आदेश आने से हमें नई प्रेरणा मिली। अब हम अपने पड़ोसी उपनगर देवनार में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के फैसले के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। हमने अपने समुदाय के लोगों को दिल्ली और ओखला में स्थित इसी तरह के प्लांट से होने वाले प्रदूषण और स्थानीय लोगों के विरोध के बारे में जागरूक किया है।

जानकारी का प्रचार-प्रसार हमारे मुख्य उद्देश्यों में से एक है और इसके लिए हम वीडियो, समाचार क्लिपिंग और सोशल मीडिया पोस्ट जैसे माध्यमों का उपयोग करते हैं।

हम लैंडफ़िल पर पुराने समय से चली आ रही मानव द्वारा मैला ढोने की प्रथा के खिलाफ भी अभियान चला रहे हैं। हम बीएमसी पर एक अतिरिक्त मुस्लिम कब्रिस्तान के निर्माण के लिए दबाव बना रहे हैं; और खुली जगहों को दोबारा ठीक करवाने के लिए काम कर रहे हैं। क़रीब 50-60 सदस्यों की हमारी कोर टीम वार्ड के विभिन्न मोहल्लों के सैकड़ों लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। उन समुदायों के पास अपने-अपने व्हाट्सएप ग्रुप हैं जहां स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की जाती है। उन समस्याओं को हल करने के तरीके खोजने के लिए कोर टीम महीने में एक या दो बार बैठक करती है।

स्थानीय नेताओं को इस बात का डर सताता रहता है कि हमारे काम का कोई राजनीतिक उद्देश्य है और उन लोगों ने असामाजिक तत्वों की मदद से हमें डराने का प्रयास भी किया। लेकिन हमारी ज़मीन मज़बूत है। समुदाय के कुछ सदस्यों ने भी हमें यह कहते हुए भटकाने की कोशिश की कि हमें अपने जीवन और करियर पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन अब, हमारे द्वारा किए गये प्रयासों के सकारात्मक परिणाम के कारण हमने अपने विरोधियों का दिल भी जीत लिया है।

शेख़ फ़ैयाज आलम गोवंडी न्यू संगम वेलफेयर सोसाइटी के प्रमुख हैं।

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