कृषि

February 4, 2026
कश्मीर घाटी से क्यों गुम हो रहे हैं पारंपरिक धान के खेत और उनकी खुशबू?
परंपरागत रूप से चावल की खेती करने वाले किसान, सेब की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खेती की जमीनों पर बनते रिहाइशी और गैर-रिहाइशी इलाके भी धान के रकबे को घटा रहे हैं।
वाहिद भट | 8 मिनट लंबा लेख
January 19, 2026
क्या भारत के कपास किसानों को जैविक खेती का जोखिम उठाना चाहिए? 
जैविक कपास की बढ़ती मांग के बावजूद किसानों को इसकी खेती में कई जोखिम उठाने पड़ते हैं। क्या अनुकूल नीतियां और सरकारी सहयोग इस तस्वीर को बदल सकते हैं?
December 23, 2025
सरल कोशः इंडिजिनस सीड्स
इंडिजिनस सीड्स (पारंपरिक बीज) किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित बीज होते हैं। मौजूदा समय में विकास सेक्टर में इन्हें जलवायु सुरक्षा और सामाजिक बदलाव का आधार माना जाता है।
December 22, 2025
सतत एफपीओ का निर्माण: भारत की सहकारी समितियों से सीख
2025 की शुरुआत तक, केंद्र सरकार की योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की जा चुकी थी। लेकिन केवल लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी एफपीओ की संरचना को कमजोर कर सकती है।
December 8, 2025
फोटो निबंध: नकदी फसलों और हाईवे के बीच रंगलोंग समुदाय का संघर्ष
उत्तरी त्रिपुरा में रबर और सुपारी जैसी नकदी फसलों की बढ़ती मांग के कारण रंगलोंग समुदाय की बांस-आधारित आजीविका और जीवनशैली पर संकट गहरा रहा है।
हंसातनु रॉय | 7 मिनट लंबा लेख
September 8, 2025
छोटे समूह, बड़ी संभावनाएं: सीमांत किसानों की नयी दिशा
सामूहिक खेती से किसान कम जमीन मिलाकर खेती कर सकते हैं, उपज बढ़ा सकते हैं और गुजर-बसर की खेती से आगे बढ़ सकते हैं।
December 18, 2024
क्या कृषि और जल संकटों का हल ग्राम स्वराज में मिल सकता है?
ग्राम स्वराज का सिद्धांत, गांवों को राजनीतिक स्वायत्तता देने के साथ-साथ जल संरक्षण, कृषि विकास और किसान कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जयेश जोशी | 7 मिनट लंबा लेख
December 3, 2024
पंचायती राज संस्थान जल सुरक्षा को तेजी से सुनिश्चित कर सकते हैं
जल प्रबंधन के स्थायी समाधानों की योजना बनाने और उन्हें सबसे उपयुक्त तरीके से ज़मीन पर लागू करने में स्थानीय सरकारें सबसे कारगर हो सकती हैं।
November 26, 2024
जलवायु संकट से निपटने के वे उपाय कौन से हैं, जो सीमांत किसान सुझाते हैं
ब्रिजस्पैन की एक रिपोर्ट जो बताती है कि कैसे देश के सीमांत किसान जिनमें मुख्यरूप से आदिवासी, दलित और महिला किसान शामिल हैं, जलवायु संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
अनंत भगवती, ऋषभ तोमर | 5 मिनट लंबा लेख
October 21, 2024
सूखे फूलों से सफलता की खुशबू बिखेरती नागालैंड की महिला उद्यमी
फूलों को सुखाने की परंपरा जो एक जरूरत के तौर पर शुरू हुई थी, कई महिलाओं के लिए आजीविका का विकल्प बन गई है।
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