कड़वी गोली

Location Iconगया जिला, बिहार,मुजफ्फरपुर जिला, बिहार

यह फीचर पहली बार द थर्ड आई की भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य और इसके संभावित भविष्य में नारीवादी जांच के हिस्से के रूप में सामने आया था। इस बारे में और अधिक पढ़ने के लिए यहाँ जाएँ।

भारत में लगभग 80 प्रतिशत डॉक्टर शहरी आबादी की जरूरतों को पूरा करने में लगे हैं। ग्रामीण भारत में आज भी लोग मौलिक स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुँच पाते हैं। यह समस्या काफी लंबे समय से चली आ रही है। शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा विभाजन के अलावा, ग्रामीण इलाकों में ही स्वास्थ्य सेवा की पहुँच में असमानता है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर ज़्यादातर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। बिहार के मुजफ्फरपुर और गया जिले में ज़मीनी समूहों की महिलाओं ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होनें बताया कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच को तय करने में जाति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

“हमारे गाँव में उप-स्वास्थ्य केंद्र वहाँ नहीं है जहां इसे होना चाहिए। यह उच्च जाति के राजपूतों के प्रभुत्व वाले इलाके में है। निम्न जाति के लोगों के लिए वहाँ पहुँचना मुश्किल है क्योंकि वे लोग छूआछूत में विश्वास करते हैं। जब अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति अपने बच्चे को लेकर टीका लगवाने वहाँ जाता है तब राजपूत समुदाय के लोग उन्हें नीची नजर से देखते हैं। ऐसी जगह पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं होना चाहिए था, इसे उस जगह बनाया जाना चाहिए जहाँ सब पहुँच सकें,” मुजफ्फरपुर जिले की निराला ने कहा।

गया जिले की ललिता अपनी बात जोड़ते हुए कहती है कि, “हमारा गाँव सदर-अस्पताल से 5-6 कीलोमीटर दूर है। वहाँ के आसपास के लोगों को समय पर हर सुविधा मिलती है। सिर्फ हाशिये की जाति के लोग ही पीछे छूट गए हैं। कभी-कभी, डॉक्टर निम्न जाति के लोगों का इलाज करते हैं। उनमें से कई गरीबी रेखा से नीचे आने के कारण अनुदान में मिलने वाली दवाओं के हकदार भी होते हैं। लेकिन इन मामले में अक्सर ऐसा होता है कि डॉक्टर दवा लिख देते हैं और फिर कहते हैं कि दवाईयाँ अस्पताल में उपलब्ध नहीं है और बाहर से खरीदनी पड़ेगी। हालांकि अगर उसी दिन उच्च जाति का कोई मरीज इलाज के लिए आता है तो उसे बिना किसी परेशानी के बेहतर इलाज और वही दवाईयाँ मिल जाती हैं।”

द थर्ड आई एक नारीवादी थिंक टैंक है जो लिंग, सेक्शुआलिटी, हिंसा, तकनीक और शिक्षा के मुद्दों पर काम करता है।

इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ें

अधिक जानें: पढ़ें कि कैसे हम आदिवासी समुदायों को शामिल करते हुए भारत के स्वास्थ्य संबंधी लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। 

अधिक करें: और अधिक जानने और उनके काम को समर्थन देने के लिए [email protected] पर लेखक से संपर्क करें।


और देखें


दिल्ली की फेरीवालियों को समय की क़िल्लत क्यों है?
Location Icon पश्चिम दिल्ली जिला, दिल्ली

जलवायु परिवर्तन के चलते ख़त्म होती भीलों की कथा परंपरा
Location Icon नंदुरबार जिला, महाराष्ट्र

क्या अंग्रेजी भाषा ही योग्यता और अनुभवों को आंकने का पैमाना है?
Location Icon अमरावती जिला, महाराष्ट्र

राजस्थान की ग्रामीण लड़की यूट्यूब का क्या करेगी?
Location Icon अजमेर जिला, राजस्थान,जयपुर जिला, राजस्थान