आदिवासी क्षेत्रों में ई-पीडीएस को बेहतर बनाती सामुदायिक सूचनाएं

Location Icon अल्लूरी सीताराम राजू जिला, आंध्र प्रदेश
नोटिस बोर्ड पर कुछ पढ़ते हुए लोग_पीडीएस
इंटरनेट की कमी के कारण परिवार अक्सर यह नहीं जान पाते हैं कि उनके राशन कार्ड की स्थिति क्या है। | चित्र साभार: एसआर संकरन आदिवासी सहाय केंद्रम

वसंथा* और उनके पति को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन पाने के लिए आठ महीने से अधिक का इंतजार करना पड़ा। वे आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के उन हजारों आदिवासी परिवारों में से हैं, जिनके लिए राशन वितरण की प्रक्रिया आज भी ऑफलाइन ही उपलब्ध है। इंटरनेट की कमी के कारण परिवार अक्सर यह नहीं जान पाते हैं कि उनके राशन कार्ड (या राइस कार्ड) की स्थिति क्या है, उन्हें कितनी मात्रा में अनाज मिलने का अधिकार है, या फिर राशन वितरण की प्रक्रिया में क्या बदलाव हुए हैं।

जहां पीडीएस ऑनलाइन है, वहां अनाज वितरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पर आधारित होता है। वहीं ऑफलाइन प्रणाली में उचित मूल्य दुकानों (एफपीएस) के डीलर राशन कार्डधारकों को 12 कूपन देते हैं (हर महीने के लिए एक कूपन)। अगर इस दौरान परिवार के सदस्यों की संख्या बदलती है या सरकार राशन कार्ड में कोई अपडेट करती है और यह बदलाव कूपन में दर्ज नहीं होता तो परिवार को उनके हिस्से का पूरा अनाज नहीं मिल पाता है।

इसके अलावा जब परिवार अपना राशन कार्ड विवरण अपडेट करने की कोशिश करते हैं तो वे अपनी आवेदन स्थिति को डिजिटली ट्रैक नहीं कर पाते हैं। उदाहरण के लिए, नए सदस्यों को जोड़ना, विवाह के बाद अलग घर बसाने वाले दंपतियों के लिए कार्ड विभाजित करना, या कोई अन्य सुधार करना।

इस समस्या को हल करने के लिए एसआर संकरन आदिवासी सहाय केंद्रम, जो सार्वजनिक सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने वाला एक सामुदायिक केंद्र है, क्षेत्र के लगभग ढाई हजार घरों के लिए हर महीने अनाज की कीमतों, राशन कार्डों और पात्रताओं से संबंधित डेटा इकट्ठा करता है। हम विभिन्न ऑनलाइन रजिस्ट्रियों और हेल्पलाइनों से जानकारी जुटाते हैं, उसे तेलुगु में अनुवादित करते हैं और फिर उसे पढ़ने में सरल ढांचे और तालिकाओं में प्रस्तुत करते हैं। इसे व्हाट्सएप संदेशों के जरिए और आंगनवाड़ियों, पंचायत भवनों, स्कूलों तथा जिले के अन्य सार्वजनिक स्थलों पर नोटिस के रूप में साझा किया जाता है। लोग इस जानकारी का उपयोग सीधे अपने अधिकारों की मांग के लिए कर पाते हैं।

एसआर संकरन आदिवासी सहाय केंद्रम द्वारा तैयार सूचना प्रारूपों के नमूने।

वसंथा का आवेदन जून 2023 में ही ऑनलाइन स्वीकृत हो चुका था। लेकिन उन्हें इसकी जानकारी दो महीने बाद मिली, जब उन्होंने हमारे द्वारा प्रसारित एक व्हाट्सएप संदेश में अपना नाम और विवरण देखा।

जब से हमने मुख्य रजिस्टरों (जिनमें हर महीने जारी किए गए राशन कार्डों की संख्या और आवंटित अनाज की इकाइयों का विस्तृत ब्यौरा होता है) का डेटा साझा करना शुरू किया है, तब से कई परिवार अपना पूरा राशन प्राप्त करने में सक्षम हुए हैं। शुरुआत में इस चलते तनाव की स्थिति भी बनी। स्थानीय समुदाय से ही आने वाले एफपीएस डीलर हमारे साथ बहस करते थे और हमारे डेटा की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते थे।

अब हम जब भी कोई जानकारी साझा करते हैं तो यह स्पष्ट रूप से दर्ज करते हैं कि इसे किस सरकारी वेबसाइट या विभाग से प्राप्त किया गया है, ताकि लोग भरोसा कर सकें कि जानकारी सत्यापित और सही है।

बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच पाना इतना कठिन नहीं होना चाहिए। राशन कार्ड एक स्थिर दस्तावेज नहीं है। यह परिवारों में होने वाले बदलाव के साथ बदलता रहता है। ऐसे में जब ये अपडेट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाते हैं तो यह बहुत से परिवारों की पहुंच से बाहर होता है। नतीजतन वे पूरी तरह एफपीएस डीलरों के मनमाने रवैये पर निर्भर होते हैं।

अक्सर ऑनलाइन प्रणालियों को भ्रष्टाचार या गड़बड़ी रोकने वाले तकनीकी समाधान के रूप में पेश किया जाता है। लेकिन कई बार यही प्रणालियां लोगों को पूरी तरह हाशिये पर धकेल देती हैं या उनके वैधानिक अधिकारों तक पहुंच को अत्यंत कठिन बना देती हैं। हमारे अनुभव से स्पष्ट है कि यदि लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर, समय पर और सुलभ जानकारी के साथ समानांतर ऑफलाइन व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, तो वे न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर सकती हैं बल्कि बुनियादी अधिकारों की भी प्रभावी रूप से रक्षा कर सकती हैं।

*गोपनीयता बनाए रखने के लिए नाम बदला गया है।

पंगी रमणाबाबू और कोर्रा लक्ष्मणराव ने भी इस लेख में योगदान दिया है।

वंथला भास्कर और जर्था मत्‍यकोंडबाबू एसआर संकरन आदिवासी सहाय केंद्रम से जुड़े हुए हैं। लिबटेक इंडिया इस केंद्र का संसाधन साझेदार है।

इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ें

अधिक जानें: जानिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में कैसे मदद करती है।

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