June 14, 2024

रिपोर्ट लिखने के दौरान आने वाली कठिनाइयां

पंचायत सीरीज के नज़रिए से जानिए कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं को किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जब रिपोर्ट लिखने की बात आती है।
6 मिनट लंबा लेख

1. जब आपका मैनेजर आपसे बहुत प्यार से इधर-उधर की बातें कर रहा हो तो समझ जाइए कि रिपोर्ट लिखने का समय आ गया है। 

पंचायत सीरीज का एक दृश्य_पंचायत सीरीज
चित्र साभार: अमेजन प्राइम वीडियो

2. रिपोर्ट लिखना शुरू करने से पहले, बीच में, और फिर हर आधे घंटे में आपकी एक ज़रूरत।

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चित्र साभार: अमेजन प्राइम वीडियो

3. जब आपको रिपोर्ट में सौ अलग-अलग तरह की जानकारियों को संक्षिप्त में लिखने पर मजबूर किया जाए।

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4. जब आपका मैनेजर पहला ड्राफ्ट पढ़ता है।

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी
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5. जब रिपोर्ट में आपको उन भारी-भरकम शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ जाए जिनके मतलब आपको खुद भी नहीं पता। 

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6. जब आपके इकट्ठा किए गए डेटा को कोई अलग तरीके से परोसने को बोल दे।

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7. बहुत मेहनत के बाद भी जब आपका मैनेजर आपको ग़लतियों की लिस्ट पकड़ा दें।

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8. जब मैनेजर आपको काम की उंच-नीच समझाने देने की जगह सिर्फ फंडर के लिए प्रभाव (इम्पैक्ट) दिखाने के लिए बोले। 

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9. इन सबके बाद भी जब डेडलाइन के दबाव में आप पूरी रात जागकर काम करें।

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लेखक के बारे में
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रवीना कुंवर

रवीना कुंवर, आईडीआर हिंदी में डिजिटल मार्केटिंग एनालिस्ट हैं। इससे पहले वे एक रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं जिसमें उनका काम मुख्यरूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित था। रवीना, मीडिया और कम्युनिकेशन स्टडीज़ में स्नातकोत्तर हैं।

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सृष्टि गुप्ता

सृष्टि गुप्ता आईडीआर में एक सम्पादकीय विश्लेषक हैं और लेख लिखने, सम्पादन और अनुवाद से जुड़े काम करती हैं। इससे पहले सृष्टि ने स्प्रिंगर नेचर में संपादन से जुड़ा काम किया है। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए किया है और लिंग, सामाजिक न्याय, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर शोध करने में रुचि रखती हैं।

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