गुजरात

एक महिला किसान के हाथों में नमक के ढेले रखे हुए हैं_सॉल्ट पैन
September 3, 2025
फोटो निबंध: बीमारी और एकाकीपन के बीच नमक उगाता अगरिया समुदाय
कच्छ के छोटे रण में नमक की खेती करने वाली अगरिया महिलाएं पानी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए विवश हैं।

छोटे रण का कच्छ गुजरात में स्थित एक दलदली आर्द्र क्षेत्र (वेटलैंड) है, जो लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां की जलवायु एकदम शुष्क है, मिट्टी अत्यधिक क्षारीय है और तापमान 52 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। ये चरम जलवायु परिस्थितियां इस क्षेत्र को नमक उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाती हैं। […]

सुदेशना चौधरी | 8 मिनट लंबा लेख
फैक्ट्री में काम करता मजदूर_प्रवासी श्रमिक
February 26, 2025
दांव पर ज़िंदगी: अरबों के टेक्सटाइल उद्योग का कड़वा सच
सूरत का भव्य टेक्सटाइल उद्योग भले ही समृद्धि की मिसाल हो, लेकिन इसकी बुनियाद प्रवासी श्रमिकों की बदहाल जीवन परिस्थितियों पर टिकी है।

नरेंद्र* के 15 वर्षीय बेटे का काम पर दूसरा दिन था। हम उसके घर लौटने का इंतज़ार कर रहे थे, जब नरेंद्र एक छोटे से अंधेरे कमरे में दाखिल हुए। “आज रात खाने में बस टमाटर है…2500 रुपए किराया और ऊपर से बिजली का बिल। अब मेरा गरीब बेटा ही मेरा सहारा है। मैं बेकार […]

दिशा डी., सिवा मलिक | 8 मिनट लंबा लेख
सामाजिक कार्यकर्ता और कच्छ महिला विकास संगठन की संस्थापक सुषमा अयंगर का चित्रण-महिला सशक्तिकरण
July 27, 2022
आईडीआर इंटरव्यूज । सुषमा अयंगर
कच्छ में अपने अभूतपूर्व काम के लिए जानी जाने वाली सुषमा अयंगर आईडीआर से बातचीत में बता रही हैं कि उनका सारा ध्यान महिला अधिकार और ग्रामीण विकास पर क्यों हैं। साथ ही उन्हें क्यों लगता है कि आज महिला सशक्तिकरण का दायरा आर्थिक परिवर्तन तक सीमित है।

सुषमा अयंगर एक सामाजिक कार्यकर्ता और कच्छ महिला विकास संगठन (केएमवीएस) की संस्थापक हैं। केएमवीएस महिलाओं को इस तरह से सक्षम बनाने पर काम करता है कि वे अपने गांव समुदाय और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी पहलों में पूरे आत्मविश्वास के साथ शामिल हो सकें और फ़ैसले लेने में अपनी ज़िम्मेदारी निभा सकें। बीते तीन […]

अटिबेन खेत में काम करते हुए-भूमि अधिकार
June 22, 2022
क्या भूमि अधिकार महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है?
गुजरात में पैरालीगल कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाती है। वह विधवाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिलवाने और ज़मीन के रिकॉर्ड पर उनका नाम दर्ज करवाने में उनकी मदद करती है।

मेरा नाम अटिबेन वर्सत है और मैं पहाड़िया (पांचाल) गाँव की रहने वाली हूँ। यह गाँव गुजरात के अरावली ज़िले के मेघराज प्रखंड में पड़ता है। मैं 2016 से वर्किंग ग्रुप फ़ॉर विमेन एंड लैंड ओनर्शिप के साथ पैरालीगल कर्मचारी के रूप में काम कर रही हूँ। यह संस्था महिलाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ […]

अटिबेन वर्सत | 6 मिनट लंबा लेख
पंजीकरण अभियान के एक काउंटर पर एक औरत। काउंटर की दो तरफ दो औरतें हैं और तीसरी औरत उनके पीछे बैठी हुई है। वे चारों तरफ से पोस्टर और पुस्तिकाओं से घिरी हुई हैं_केएमवीएस-महिला घरेलू हिंसा
February 16, 2022
भुज की बहनों से मिलें 
पिछले दो दशकों से कच्छ के 200 गांवों में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही एक अर्धन्यायिक (पैरालीगल) के जीवन में एक दिन।

पिछले 22 वर्षों से मैं गुजरात के कच्छ क्षेत्र के कुछ दूरदराज़ के गाँवों में स्वयंसेवी संस्था कच्छ महिला विकास संगठन (केएमवीएस) के साथ काम कर रही हूँ। कच्छ भारत का सबसे बड़ा ज़िला है और उसमें विविधता बहुत है—यहाँ कई समुदाय, भाषा, कपड़े, भोजन और धर्म हैं और यही कच्छ की ताकत है। हम ज़िले भर में […]

खाताबेन समेजा | 7 मिनट लंबा लेख