युवा सशक्तिकरण
युवाओं को समझने से पहले, हमें खुद को समझना होगा
हम अक्सर सवाल करते हैं कि युवाओं में क्या बदला जाए। लेकिन अगर समाज उन्हें अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की आज़ादी ही न दे, तो क्या इतना काफ़ी है?मेघालय में फुटबॉल से ज़िंदगी के मैदान पर उतरते युवा
शिलांग का यह फुटबॉल क्लब बच्चों को सिर्फ खेल नहीं, ज़िंदगी जीना भी सिखा रहा है। देखिए मेघालय से हमारी यह कहानी।गांव का युवा आज भी स्किल ट्रेनिंग से दूर क्यों है?
डीडीयू-जीकेवाई योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना था। लेकिन वर्तमान में यह जागरूकता की कमी, सामाजिक रुकावटों और पाठ्यक्रम की कमियों से जूझती नजर आती है।जुगनू: रेड लाइट एरिया में पली पीढ़ी की निराली मैगजीन
मुजफ्फरपुर, बिहार में चार पन्नों से शुरू हुआ 'जुगनू' अखबार आज 36 पेज की एक मैगजीन बन गया है और अब यहां के युवाओं को एक नई पहचान दे रहा है।नई इंटर्नशिप योजना: युवाओं की उड़ान या अधूरी पहचान?
भारत की नई इंटर्नशिप योजना एक मजबूत पहल है। लेकिन जागरूकता की कमी, ढीले नियम और स्थायी रोजगार की कमी इसे कमजोर बना सकते हैं।घुमंतू और विमुक्त जनजाति के युवाओं के लिए सामाजिक न्याय
एनटी-डीएनटी एक्टिविस्ट और अनुभूति संस्था की संस्थापक, दीपा पवार से सुनिए कि सामाजिक न्याय के व्यावहारिक प्रयास कैसे होने चाहिए।हाशिये पर मौजूद युवाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रयास कैसे होने चाहिए?
युवाओं से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य के प्रयास तब अधिक प्रभावी होते हैं जब ये उनके लिए प्रासंगिक, लोगों पर ध्यान केंद्रित करने वाले और समुदाय द्वारा चलाए जाने वाले हों।क्या युवाओं को दूसरे देशों में श्रम कार्य करने भेजना एक सही फैसला है?
अपनी विशाल आबादी की बदौलत भारत, कई दशकों से अपनी युवा श्रम शक्ति के लिए योग्य रोजगार ढूंढ पाने में असफल एवं संघर्षरत रहा है।क्या युवा सामाजिक मुद्दों में रुचि लेता है?
ये आंकड़े जो बता रहे हैं, ये आंकड़े क्या बता रहे हैं।