असमानता
वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026: भारत के सोशल सेक्टर के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैश्विक जोखिम दूर लगते हैं, पर उनका असर गांवों, कस्बों और शहरों में स्पष्ट दिखता है। महंगाई, बाढ़, गर्मी, गलत सूचना, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव अब भारतीय सामाजिक क्षेत्र की रोज़मर्रा की हकीकत हैं। यही इस रिपोर्ट की प्रमुख प्रासंगिकता है।कॉमन्स और बाजार के बीच कहां खड़े हैं वन आश्रित समुदाय?
समुदायों की बाज़ार में समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ यह तय करना भी जरूरी है कि वन और प्रकृति, बाजार की ताकतों के अधीन न हो जाएं।दलित हिस्ट्री मंथः एक महीने की क्रांति, बाकी साल शांति
जब तक फैसले लेने वालों के सरनेम नहीं बदलते, तब तक दलित हिस्ट्री मंथ कैलेंडर की एक औपचारिक तारीख भर है।सरल कोश: एंटाइटलमेंट
एंटाइटलमेंट का अर्थ सिर्फ एक शब्द की समझ तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि अधिकार कैसे पहचाने जाएं और उन्हें हासिल करने की प्रक्रिया क्या है।आईडीआर इंटरव्यूज | डॉ. राम पुनियानी
देश में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सवालों पर मुखर हस्तक्षेप करने वाले वरिष्ठ चिंतक डॉ. राम पुनियानी आईडीआर से बातचीत में भारत में सांप्रदायिकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुलतावाद और सामाजिक सद्भाव के सामने खड़ी चुनौतियों पर अपने अनुभव और विचार साझा कर रहे हैं।आईडीआर इंटरव्यूज | राजिम केतवास
पिछले चार दशकों से श्रमिक एवं महिला अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रही राजिम केतवास मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन में भागीदारी से लेकर अपने संगठन दलित आदिवासी मंच की स्थापना तक की यात्रा और अनुभवों को साझा कर रही हैं।‘नारीवादी शिक्षा’ सुनकर आपके मन में क्या आता है?
द थर्ड आई के इस वीडियो के जरिए अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए देशभर के लोगों से जानिए कि वे नारीवादी शिक्षा शब्द को किस तरह देखते और समझते हैं।जातिवाद के आईने में समाज: दलित साहित्य की पांच जरूरी किताबें
दलित साहित्य पढ़कर हम समझ पाते हैं कि जातिवाद की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके उन्मूलन के लिए किस प्रकार के सामाजिक और मानसिक परिवर्तनों की जरूरत है।एप्प से आंदोलन तक: क्या है तेलंगाना के राइड चालकों की मांग?
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर अपनी घटती आय और बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ लगातार संघर्षरत हैं।