December 23, 2025

सरल कोशः इंडिजिनस सीड्स

इंडिजिनस सीड्स (पारंपरिक बीज) किसानों द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित बीज होते हैं। मौजूदा समय में विकास सेक्टर में इन्हें जलवायु सुरक्षा और सामाजिक बदलाव का आधार माना जाता है।
2 मिनट लंबा लेख

सरल-कोश में इस बार का शब्द है ‘इंडिजिनस सीड्स’।

पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र और विकास सेक्टर में इस शब्द का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन पर बढ़ती चिंताओं के बीच इंडिजिनस सीड्स केवल कृषि से संबंधित विषय भर नहीं रह गया है। आज यह आजीविका, संस्कृति और समुदाय के विकास से भी परस्पर जुड़ा हुआ है।

लेकिन आखिर इंडिजिनस सीड्स होते क्या हैं? इन्हें दोबारा क्यों अपनाया जा रहा है और यह विकास सेक्टर के कामकाज से कैसे संबंधित हैं? इस बार के सरल-कोश में हम इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी

इस एपिसोड में जानिए कि कैसे पारंपरिक बीजों का स्थानीय ज्ञान, जलवायु और भूगोल से गहरा नाता है, और कैसे ये औद्योगिक कृषि के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। साथ ही समझिए कि इंडिजिनस सीड्स किस तरह से टिकाऊ खेती में मददगार हैं और इन बीजों का संरक्षण क्यों जरूरी है।

अगर आप इस सीरीज में किसी अन्य शब्द को समझना चाहते हैं, तो उसे हमारे यूट्यूब के कमेंट सेक्शन में लिखना न भूलें।

अधिक जानें

  • जानिए, पश्चिम बंगाल के मछुआरे खेती को अपना नया पेशा क्यों बना रहे हैं?
  • जानिए, कैसे मौसम की अनियमितता किसानों से उनकी खेती-बाड़ी छीन रही है।
लेखक के बारे में
इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू-Image
इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू

इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू (आईडीआर) डेवलपमेंट कम्यूनिटी में काम कर रहे नेतृत्वकर्ताओं के लिए बना भारत का पहला स्वतंत्र मीडिया प्लैटफ़ॉर्म है। हमारा लक्ष्य भारत में सामाजिक प्रभाव से जुड़े ज्ञान का विस्तार करना है। हम वास्तविक दुनिया की घटनाओं से हासिल विचारों, दृष्टिकोणों, विश्लेषणों और अनुभवों को प्रकाशित करते हैं।

टिप्पणी

गोपनीयता बनाए रखने के लिए आपके ईमेल का पता सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *