January 25, 2024

आईडीआर एक्सप्लेन्स: भारत में स्थानीय सरकार

संविधान में विकेन्द्रीकरण की व्यवस्था तो कर दी गई है लेकिन ज़रूरी है कि राज्य भी स्थानीय सरकार की क्षमता को बढ़ाने पर काम करें।
2 मिनट लंबा लेख

छब्बीस जनवरी यानी हमारा गणतंत्र दिवस। साल 1950 में इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। हमारे देश के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के नियम-कायदे और समूची व्यवस्था संविधान द्वारा ही तय की जाती है। साल 1992 में देश ने 73वें और 74वें संशोधन के रूप में विकेंद्रीकरण की तरफ अपना कदम बढ़ाया। इसका उद्देश्य ज़मीनी स्तर के लोकतंत्र को मज़बूत करके स्थानीय राजनीतिक इकाइयों को मज़बूत बनाना था।

इस वीडियो में आप जानेंगे कि 73वें और 74वें संशोधनों के लागू होने के बाद देश के प्रत्येक राज्य के लिए यह ज़रूरी हो गया कि वे गांव और शहरों में अलग-अलग स्थानीय सरकारों का गठन करें। साथ ही, काम करने के लिए उन्हें फंड देने वाली व्यवस्था बनाएं और हर पांच साल में स्थानीय चुनाव करवाएं। इसके पीछे सोच यह थी कि आम लोगों पर सीधा असर डालने वाले फ़ैसलों में उनकी राय शामिल होनी चाहिए। साथ ही, यह भी माना गया कि स्थानीय समस्याओं का सबसे अच्छा और उचित हल भी स्थानीय लोग और सरकारें ही निकाल सकती हैं।

सभी राज्य सरकारें अपने नीचे आने वाली स्थानीय सरकारों द्वारा किए जाने वाले कामकाज के लिए ज़िम्मेदार होती हैं। इसलिए इन स्थानीय सरकारी संस्थानों को मिलने वाली शक्तियां उनके राज्य के क़ानूनों पर निर्भर करती हैं। स्थानीय सरकारें, जहां ज़मीनी स्तर पर विकास को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं, वहीं इसकी ज़िम्मेदारी एक समुचित प्रणाली के रूप में केंद्र, राज्य और ज़िला प्रशासन तीनों पर है। इन सबको एक सहजता से चलने वाली मशीन की तरह काम करना होता है, ताकि स्थानीय सरकारें अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए नियमित और सुचारू रूप से काम कर सकें।

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